RBI ने NRI ग्राहकों के लिए FCNR(B) डिपॉजिट पर दिया बड़ा तोहफा, 2013 से भी ज्यादा मिले पैसे.

बैंक ऑफ इंडिया की एक खास रिसर्च रिपोर्ट सामने आई है जिसमें बताया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के द्वारा फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट डिपॉजिट पर हेजिंग कॉस्ट उठाने के फैसले से बहुत तगड़ा फायदा हुआ है। इस शानदार पहल को साल 2013 में आई ऐसी ही योजना से भी कहीं ज्यादा मजबूत प्रतिक्रिया मिली है। केंद्रीय बैंक ने इस सुविधा को पिछले साल 5 जून 2026 को सर्कुलर के जरिए शुरू किया था, जिसके तहत ऑथराइज्ड डीलर कैटेगरी-वन बैंकों को 3 से 5 साल के टेन्योर वाले एफसीएनआर डिपॉजिट को आरबीआई के साथ स्वैप करने की अनुमति दी गई थी। इस पूरी प्रक्रिया में आरबीआई ने अपने ऊपर पूरा हेजिंग खर्च उठाया, जो सालाना करीब 280 से 300 बेसिस पॉइंट आंका गया था।
समय से पहले बंद हुई योजना और जबरदस्त आंकड़े
इस डिपॉजिट को जुटाने की विंडो को शुरुआत में 30 सितंबर 2026 तक बंद होना था, लेकिन भारी मात्रा में पैसा आने की वजह से आरबीआई ने इसकी आखिरी तारीख को पहले ही बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दिया था। इसके बाद स्वैप विंडो को 16 अक्टूबर 2026 तक खुला रखा गया था। इन सभी डिपॉजिट्स को कैश रिजर्व रेश्यो यानी CRR और स्टेटूरिटी लिक्विडिटी रेश्यो यानी SLR के नियमों से पूरी तरह छूट दी गई थी, हालांकि इसमें केवल मूल राशि यानी प्रिंसिपल अमाउंट को ही शामिल किया गया था और पहले साल के भीतर पैसे निकालने पर पूरी पाबंदी थी। इस पूरी प्रक्रिया में देश के कई बड़े नाम शामिल रहे जैसे कि HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank, State Bank of India, Punjab National Bank, AU Small Finance Bank और Kotak Mahindra Bank, जिन्होंने मुख्य रूप से खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों यानी NRIs और विदेशी नागरिकों यानी OCIs को टारगेट किया था।
बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट और प्रमुख आंकड़े
| विवरण (Details) | तथ्य और आंकड़े (Facts & Figures) |
|---|---|
| शुरुआत की तारीख | 5 June 2026 |
| संशोधित अंतिम तिथि | 31 August 2026 |
| कुल जुटाई गई राशि (FCNR B) | USD 127.2 Billion |
| कुल डॉलर मोबिलाइजेशन का हिस्सा | 90% से अधिक |
| बैंक ऑफ इंडिया का लक्ष्य | USD 3 Billion |
| ब्याज दरों में कटौती की तारीख | 1 September 2026 |
मिली जानकारी के मुताबिक 31 अगस्त 2026 तक आरबीआई ने इस योजना के तहत कुल USD 127.2 बिलियन जुटा लिए थे, जो आरबीआई के कुल डॉलर जुटाने के उपायों का 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हिस्सा बनता है। कार्यक्रम के अंतिम दिनों में पैसे आने की रफ्तार बहुत तेज हो गई थी और केवल 21 अगस्त से 31 अगस्त के बीच ही इसमें लगभग USD 62 बिलियन की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। बैंक ऑफ इंडिया ने अपने स्तर पर इस मुहिम के लिए USD 3 बिलियन का लक्ष्य तय किया था, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। वित्त मंत्रालय की ओर से यह जानकारी दी गई है कि सरकार ने इन सभी उपायों के जरिए कम से कम लागत में देश के बाहरी आर्थिक बफर को बहुत मजबूत कर लिया है।
ब्याज दरों में कटौती और बैंकों का नया रुख
इस शानदार सुविधा के बंद होने के तुरंत बाद देश के कई बड़े वित्तीय संस्थानों ने 1 सितंबर 2026 से अपनी ब्याज दरों को घटाना शुरू कर दिया है। पंजाब नेशनल बैंक ने 1 मिलियन डॉलर से कम के डिपॉजिट के लिए अपने 5 साल के एफसीएनआर रेट को 6.50% से घटाकर 3.06% कर दिया है। इसके अलावा एक्सिस बैंक ने भी अपने 3 से 5 साल के टेन्योर वाले रेट्स को 6.25% से घटाकर क्रमशः 3.25% और 2.95% कर दिया है। भारी मात्रा में पैसा आने की वजह से सिस्टम में पिछले चार सालों में सबसे ज्यादा नकदी यानी लिक्विडिटी बढ़ गई है, जिसे नियंत्रित करने के लिए अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आरबीआई आने वाले समय में वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो या इंक्रीमेंटल कैश रिजर्व रेश्यो जैसे सख्त वित्तीय उपायों का सहारा ले सकता है।