बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए बड़ा संकट, फंड की कमी से शिक्षा और भोजन पर मंडराया खतरा

Nura Basta26 August 20262 min read44 viewsWorld
बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए बड़ा संकट, फंड की कमी से शिक्षा और भोजन पर मंडराया खतरा

बांग्लादेश में रह रहे लगभग 1.2 मिलियन रोहिंग्या शरणार्थियों के सामने एक बहुत बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है। फंड में भारी कमी आने के कारण इन लोगों को मिलने वाले खाने, साफ पानी और शिक्षा जैसी बुनियादी चीजें बहुत कम मिल पा रही हैं। इस संकट को अब दसवां साल शुरू हो चुका है, क्योंकि 25 अगस्त 2026 को रोहिंग्या नरसंहार दिवस के नौ साल पूरे हो चुके हैं और स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है।

फंड की भारी कमी और अधिकारियों के बयान

बांग्लादेश में UNHCR के प्रतिनिधि इवो फ्रेइजसेन ने बताया कि यह परेशानी पूरी दुनिया में मानवीय सहायता के लिए पैसे की कमी के कारण हो रही है। उन्होंने जानकारी दी कि साल 2026 के लिए जो ज्वाइंट रिस्पांस प्लान यानी JRP अपील $710.5 मिलियन की थी, वह पिछले साल की तुलना में 26 प्रतिशत कम थी। इसके अलावा, शरणार्थी राहत और प्रत्यावर्तन आयुक्त मिजानुर रहमान ने बताया कि इस कमी की वजह से शरणार्थियों में कुपोषण बहुत बढ़ गया है और कई जरूरी सेवाएं बंद करनी पड़ी हैं।

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फंड की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर सबसे ज्यादा पड़ा है। रोहिंग्या लर्निंग सेंटर जो पहले करीब 8,000 हुआ करते थे, उनकी संख्या घटकर अब 6,000 से भी कम रह गई है। इस वजह से 300,000 से अधिक बच्चों की औपचारिक शिक्षा रुक गई है, हालांकि म्यांमार करिकुलम पायलट जैसी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ReliefWeb की रिपोर्ट देख सकते हैं।

स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चिंता

ऑक्सफैम बांग्लादेश के कंट्री डायरेक्टर अनिल पंत ने चेतावनी दी है कि पैसे की कमी के कारण पिछले दस सालों में बनाई गई व्यवस्था अब खतरे में पड़ गई है। वहीं सेव द चिल्ड्रन के गोलम मोस्तोफा ने कहा कि शरणार्थी शिविरों में एक पूरी पीढ़ी ऐसी बड़ी हो रही है जिनके भविष्य की उम्मीदें धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं। इसके अलावा राहत कार्यों में एक और बड़ी समस्या यह सामने आई है कि JRP फंड का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों को मिलता है, जबकि स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों यानी NGOs को केवल 2.5 प्रतिशत हिस्सा ही मिल पाता है। इस पूरी स्थिति की विस्तृत जानकारी इस रिपोर्ट में दी गई है।

वर्तमान में स्थिति यह है कि शरणार्थियों को मिलने वाला भोजन राशन प्रति व्यक्ति $7 से $12 के बीच सीमित कर दिया गया है। इन तमाम मुश्किलों को देखते हुए 26 अगस्त 2026 को एक कनाडाई संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने अपनी रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में म्यांमार में सुरक्षित, स्वेच्छा से और सम्मान के साथ वापसी के लिए एक अलग पुनर्वास मार्ग बनाने और कूटनीतिक दबाव को बढ़ाने की सिफारिश की गई है।

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