रूस और ईरान के बीच 25 अरब डॉलर का बड़ा परमाणु समझौता, अमेरिका की धमकियों के बाद भी हुआ ऐलान।

अमेरिका की सख्त पाबंदियों और चेतावनियों के बीच रूस और ईरान ने हाथ मिला लिया है। दोनों देशों के बीच 26 अगस्त 2026 को 25 अरब डॉलर का एक बड़ा परमाणु समझौता हुआ है। इस डील के तहत ईरान में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र तैयार किए जाएंगे। इसे ईरान का अब तक का सबसे बड़ा परमाणु प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच का रिश्ता और ज्यादा मजबूत हो रहा है। आम आदमी की भाषा में समझें तो इस प्रोजेक्ट से ईरान में बिजली और ऊर्जा से जुड़ी बड़ी योजनाओं पर काम तेजी से आगे बढ़ेगा, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे लेकर तनाव काफी बढ़ गया है।
परमाणु प्रोजेक्ट की मुख्य बातें और अमेरिकी पाबंदियां
इस समझौते के तहत दक्षिणी ईरान के सिरीक इलाके में 500 हेक्टेयर जमीन पर चार तीसरी पीढ़ी के रिएक्टर बनाए जाएंगे। इनकी कुल क्षमता 5 गीगावाट होगी। इसके अलावा इस अनुबंध में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर भी आपसी सहयोग की बात पक्की की गई है। दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए बेहद आक्रामक रणनीति पर काम कर रहे हैं। स्कॉट बेसेंट ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी संस्थाएं ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग में मदद करेंगी, उन्हें अमेरिकी डॉलर सिस्टम से पूरी तरह बाहर कर दिया जाएगा।
ईरान का रुख और नेताओं की आगामी बैठक
अमेरिकी पाबंदियों और दबाव के जवाब में ईरान के वित्त और आर्थिक मामलों के मंत्री अली मदानिजादेह ने 24 अगस्त 2026 को यह स्पष्ट कर दिया कि उनका देश हर तरह की पाबंदियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब ईरान का रक्षा रुख केवल बचाव तक सीमित नहीं रहेगा। इस पूरे मामले को आगे बढ़ाने के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले हफ्ते किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में मुलाकात करेंगे, जहां इस समझौते को लागू करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। रूस में ईरान के राजदूत काज़म जलाली ने भी यह जानकारी दी है कि फारसी खाड़ी के पास की इस साइट को आधिकारिक रूप से तय कर लिया गया है और दोनों देश रेडियोफार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में भी मिलकर काम कर रहे हैं।
आईएमएईए के निरीक्षकों को रोका गया
इंस्टिट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर की 27 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में घरेलू ईंधन संकट और भारी आर्थिक दबाव होने के बावजूद ईरानी अधिकारी किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान ने अमेरिका और इजरायल के निशानों पर रहे परमाणु स्थलों का दौरा करने से इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी यानी IAEA के निरीक्षकों को रोक दिया है। इसके अलावा, ईरानी सरकार के कुछ हिस्सों में अब यह आवाज भी उठने लगी है कि देश को परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।