रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का बड़ा बयान, पश्चिम देशों के साथ अब 2022 जैसे रिश्ते नामुमकिन.

मॉस्को में इस हफ्ते हुई हाई-लेवल कूटनीतिक बैठकों और वार्ताओं को लेकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अब पश्चिमी देशों के साथ फरवरी 2022 से पहले जैसे रिश्ते दोबारा कायम होना लगभग नामुमकिन है। रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी आरटी के मुताबिक, हाल ही में वेटिकन के वरिष्ठ राजनयिक आर्कबिशप पॉल रिचर्ड गैलाघर और सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ मॉस्को के दौरे पर पहुंचे थे, जिसके बाद यह कूटनीतिक बयान सामने आया है।
यूक्रेन संघर्ष और वेटिकन के साथ बातचीत
शुक्रवार को दिए गए एक इंटरव्यू में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बताया कि आर्कबिशप गैलाघर के साथ उनकी मुख्य बातचीत यूक्रेन संघर्ष को लेकर हुई थी। वेटिकन के प्रतिनिधि ने इस युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करने की इच्छा जताई और मानवीय मुद्दों पर आपसी सहयोग जारी रखने की पेशकश भी की। इस दौरान कैदियों की अदला-बदली और मारे गए सैनिकों के शवों के आदान-प्रदान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा की गई। लावरोव ने कहा कि वेटिकन के प्रतिनिधि रूसी पक्ष की स्थिति को भली-भांति समझ गए होंगे क्योंकि रूस की तरफ से शांति और सद्भावना दिखाने में कभी कोई कमी नहीं रही है।
पुराने समझौतों और पश्चिमी देशों पर अविश्वास
बातचीत के दौरान लावरोव ने साल 2014 के समझौते, मिन्स्क समझौतों और साल 2022 में इस्तांबुल में हुई बैठकों का खुलकर हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने कभी भी पहले हुए समझौतों का सम्मान नहीं किया। जब उनसे यह सवाल किया गया कि रूस ने पश्चिमी देशों पर इतना भरोसा क्यों किया, तो उन्होंने जवाब दिया कि रूसी लोग जब किसी पर भरोसा करते हैं, तो वह भरोसा "आखिर तक" होता है। लेकिन अब वह दौर पूरी तरह समाप्त हो चुका है और मॉस्को को अब सार्वजनिक आश्वासनों या वार्ताओं पर पहले जैसा विश्वास नहीं रहा है।
युद्धविराम और पश्चिमी दबाव पर रूस का रुख
लावरोव ने कहा कि मौजूदा संपर्क रेखा पर तत्काल युद्धविराम के लिए पश्चिमी देशों की तरफ से डाला जा रहा दबाव केवल संघर्ष को कुछ समय के लिए रोक सकता है, लेकिन इससे कोई स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में प्रस्तावित 'स्टेबिलाइजेशन फोर्स' का भी कड़ा विरोध किया है। उनका मानना है कि इस तरह की सैन्य तैनाती से यूक्रेन की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को ही समर्थन मिलेगा। इसके अलावा, उन्होंने पिछले साल एंकरेज में हुई रूस-अमेरिका उच्चस्तरीय बैठक का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ के साथ शांति प्रस्ताव के सभी अहम बिंदुओं पर खुलकर चर्चा की थी, लेकिन अमेरिका ने बाद में इस पूरी व्याख्या से असहमति जताई थी।
सीआईए डायरेक्टर के दौरे पर सीमित जानकारी
सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ के मॉस्को दौरे के संबंध में पूछे जाने पर लावरोव ने बहुत सीमित जानकारी साझा की और कहा कि वह उस वक्त वहां मौजूद नहीं थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि खुफिया एजेंसियां आम तौर पर अपने विशेष और स्थापित चैनलों के जरिए ही संपर्क साधती हैं और ऐसे मामलों में बातचीत का सार्वजनिक न होना कोई असाधारण बात नहीं है। संवेदनशील मुद्दों पर चल रही वार्ताओं की जानकारी को सार्वजनिक करने से संभावित समझौतों और आपसी सहमति की पूरी प्रक्रिया को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। अंत में उन्होंने यह भी कहा कि रूस अमेरिका या अन्य पश्चिमी देशों की तरफ से आने वाले किसी भी नए और सकारात्मक प्रस्ताव को सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन बातचीत के साथ-साथ रूस जमीन पर अपनी सैन्य गतिविधियां भी लगातार जारी रखेगा।