रूस का बड़ा कदम, सेंट पीटर्सबर्ग में जर्मन वाणिज्य दूतावास बंद करने का दिया आदेश

मॉस्को और बर्लिन के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और इसी कड़ी में रूस ने जर्मनी के खिलाफ एक और बड़ा जवाबी कदम उठाया है। रूस के विदेश मंत्रालय ने जर्मनी को कड़ा संदेश देते हुए सेंट पीटर्सबर्ग स्थित जर्मन महावाणिज्य दूतावास को पूरी तरह से बंद करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। दोनों देशों के बीच उपजे इस ताजा कूटनीतिक विवाद ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और इसका असर अब सांस्कृतिक संस्थानों पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है.
क्यों उठाया गया यह कूटनीतिक कदम
रूस की तरफ से उठाया गया यह सख्त कदम असल में जर्मनी के उस फैसले का जवाब है, जिसके तहत बर्लिन ने बॉन स्थित रूसी वाणिज्य दूतावास और बर्लिन में बने रूसी सांस्कृतिक केंद्र को बंद करने का आदेश दिया था। जर्मनी की इस कार्रवाई के बाद से ही मॉस्को नाराज चल रहा था और अब रूस ने भी ठीक वैसा ही कदम उठाते हुए जर्मन राजनयिकों और संस्थानों पर गाज गिराई है। रूसी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वे अपने देश में इस तरह के फैसलों को बर्दाश्त नहीं करेंगे और हर कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
इन तारीखों तक करना होगा आदेश का पालन
रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, सेंट पीटर्सबर्ग में स्थित जर्मन वाणिज्य दूतावास को हर हाल में 18 सितंबर तक अपना सारा संचालन पूरी तरह से बंद करना होगा। इसके साथ ही रूस के भीतर काम कर रहे जर्मनी के प्रसिद्ध गोएथे-इंस्टीट्यूट के सांस्कृतिक केंद्रों की गतिविधियों पर भी पूरी तरह रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि इन संस्थानों में तैनात सभी कर्मचारियों को 13 सितंबर तक हर हाल में रूस की सीमा छोड़कर जाने का कड़ा फरमान सुनाया गया है।
जर्मनी का पुराना आरोप और रूस की प्रतिक्रिया
आपको बता दें कि जर्मनी ने यह सारी कार्रवाई लीपजिग और हाले हवाई अड्डे पर हुए एक कथित ड्रोन हमले के प्रयास को लेकर की थी। बर्लिन की सरकार ने इस पूरी घटना के लिए सीधे तौर पर मॉस्को को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि, रूस ने जर्मनी के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत करार दिया है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि जर्मनी बिना किसी ठोस सबूत के उन पर आरोप लगा रहा है और बेवजह द्विपक्षीय रिश्तों को खराब कर रहा है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने जर्मनी पर यह भी आरोप लगाया कि वह दोनों देशों के पुराने संबंधों में लगातार तनाव पैदा करने का काम कर रहा है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस पूरी मौजूदा स्थिति के जितने भी बुरे परिणाम सामने आएंगे, उन सबकी पूरी और अकेली जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ जर्मन सरकार की ही होगी। इस तरह के फैसलों से आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते और ज्यादा बंद होने की आशंका जताई जा रही है.