Saudi Arabia: सऊदी अरब के आसमान में दिखा अद्भुत खगोलीय नजारा, चंद्र ग्रहण के साथ दिखा रबीउल अव्वल का चांद.

सऊदी अरब के आसमान में शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को एक बेहद खूबसूरत और दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिली, जब आंशिक चंद्र ग्रहण और रबीउल अव्वल 1448 हिजरी का पूरा चांद एक साथ नजर आए। यह अद्भुत नजारा मक्का, मदीना, जेद्दा, तबूक, जाज़ान और अरअर सहित देश के कई हिस्सों में साफ तौर पर दिखाई दिया। इस खगोलीय घटना की शुरुआत स्थानीय समयानुसार सुबह 4:23 बजे पेनम्ब्रा यानी उपछाया चरण के साथ हुई थी, जबकि आंशिक ग्रहण का मुख्य चरण सुबह करीब 5:33 बजे शुरू हुआ। खगोल विज्ञान के जानकारों के अनुसार यह पूरा नजारा लगभग 5 घंटे और 38 मिनट तक बना रहा, जिसमें अकेले आंशिक चरण का समय लगभग 3 घंटे और 18 मिनट का था। इस बारे में अधिक जानकारी आधिकारिक Saudi Press Agency (SPA) की रिपोर्ट से मिलती है।
खगोल वैज्ञानिकों ने दी अहम जानकारी
खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष क्लब से जुड़े अदनान खलीफ ने बताया कि वैश्विक स्तर पर अपने चरम समय के दौरान चांद की डिस्क का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा धरती की छाया के भीतर चला गया था, जिसके कारण यह नजारा देखने में पूर्ण चंद्र ग्रहण जैसा ही लग रहा था। इसके अलावा जेद्दा एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी के प्रमुख इंजीनियर माजिद अबू जाहिरा ने पुष्टि की कि इस ग्रहण को देखने का मौका मुख्य रूप से देश के पश्चिमी इलाकों के लोगों को ही मिला। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि रियाद जैसे मध्य और पूर्वी इलाकों में चांद पहले ही अस्त हो चुका था। खगोलीय शोधकर्ता अली अल-हजड़ी ने इस बात को और स्पष्ट करते हुए बताया कि पृथ्वी की छाया शंकु के मुकाबले चांद की स्थिति ऐसी थी कि पूर्वी सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में यह ग्रहण नहीं देखा जा सका। वैश्विक स्तर पर इसका पीक टाइम मक्का के समय के अनुसार सुबह 7:12 बजे था, लेकिन सऊदी अरब में चांद के डूब जाने की वजह से उस समय यह यहां दिखाई नहीं दिया।
लगातार तीसरे साल दिखा ऐसा नजारा और अदा की गई खास नमाज
सऊदी स्पेस एजेंसी और नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एट्रोनॉमी एंड जियोफिज़िक्स के विशेषज्ञों डॉ. यासर अब्देल-हादी और डॉ. मनार मोहम्मद अबादी ने बताया कि यह लगातार तीसरा साल है जब चंद्र ग्रहण और रबीउल अव्वल का पूरा चांद एक ही समय पर सामने आए हैं। इस खगोलीय घटना की वजह से चांद का रंग बेहद खूबसूरत और अलग यानी हल्का लाल रंग का नजर आ रहा था। इस अनोखे और पवित्र नजारे को देखते हुए इस्लामिक परंपरा के अनुसार देश में 'सलात अल-कुसुफ' यानी पारंपरिक चंद्र ग्रहण की नमाज भी अदा की गई। इस विशेष नमाज को बुलाने के लिए 'الصلاة جامعة' शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है और इसके लिए पारंपरिक अजान या इक़ामत नहीं दी जाती है। जानकारों ने आम लोगों को यह भी भरोसा दिलाया कि सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी खास चश्मे की जरूरत नहीं होती है और इसे नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित होता है।