सऊदी अरब और रूस की बड़ी बैठक, वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने पर बनी सहमति.

सऊदी अरब के विदेश मंत्री Faisal bin Farhan ने 8 सितंबर 2026 को अपनी रूस की आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों की साझेदारी को बहुत जरूरी बताया। रूसी राजधानी मॉस्को में अपने समकक्ष रूसी विदेश मंत्री Sergei Lavrov के साथ बातचीत के बाद उन्होंने कहा कि यह सहयोग राजनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर लगातार मजबूत हो रहा है और दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों को संभालने में बहुत मददगार साबित हुआ है।
ओपेक प्लस देशों का बड़ा फैसला
यह उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठक उस रणनीतिक फैसले के कुछ दिनों बाद हुई है जो 6 सितंबर 2026 को लिया गया था। उस दिन OPEC+ के सात देशों की एक वर्चुअल बैठक हुई थी जिसमें सऊदी अरब और रूस भी शामिल थे। इस बैठक में अक्टूबर 2026 तक कच्चे तेल के मौजूदा उत्पादन स्तर को बनाए रखने पर सहमति बनी थी। इन सभी सदस्य देशों ने मिलकर Declaration of Cooperation के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया था।
वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत रिश्ते
इस साझेदारी की मजबूती का जिक्र इसी साल जून 2026 में सऊदी ऊर्जा मंत्री Prince Abdulaziz bin Salman ने भी किया था। उन्होंने कहा था कि रूस के साथ संबंध बड़ी से बड़ी वैश्विक चुनौतियों और भू-राजनीतिक दबावों का सामना करने में पूरी तरह सफल रहे हैं। रियाद में 8 सितंबर 2026 को आयोजित एक सम्मेलन में शामिल राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों ने भी माना कि ऐसे संतुलित रिश्तों से सऊदी अरब को ऊर्जा सप्लाई स्थिर रखने और बिना किसी बाहरी दबाव के स्वतंत्र फैसले लेने में मदद मिलती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि OPEC+ गठबंधन में सऊदी अरब और रूस के अलावा Iraq, Kuwait, Kazakhstan, Algeria और Oman जैसे देश भी शामिल हैं जो मिलकर वैश्विक तेल बाजार पर नजर रखते हैं औरसफा फैसला लेते हैं।