Saudi Arabia News: सऊदी अरब ने मांगी इसराइल की खुफिया मदद, अमेरिका के जरिए बनी बात

सऊदी अरब ने अपने देश की सुरक्षा को मजबूत करने और लगातार हो रहे हमलों से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। देश में बढ़ते हूती हमलों के बीच सऊदी अरब ने इसराइल से खुफिया सहायता मांगी है। इस पूरी प्रक्रिया को अमरीका के केंद्रीय कमान यानी US CENTCOM के जरिए पूरा किया जा रहा है। इस बारे में समाचार एजेंसी 'Walla' और क्षेत्रीय स्रोतों से 15 सितंबर और 16 सितंबर 2026 के बीच जानकारी सामने आई है। इस मदद का मुख्य उद्देश्य सऊदी अरब के तेल ढांचे और लाल सागर में चल रहे समुद्री व्यापार के रास्तों को सुरक्षित करना है।
हूती हमलों से बढ़ी चिंता और तेल शिपमेंट पर असर
यह खुफिया तालमेल कई हिंसक घटनाओं के बाद सामने आया है। मक्का के पास 15 सितंबर 2026 को एक ड्रोन को हवा में ही रोक लिया गया था। सऊदी अधिकारियों ने इस घटना को एक बहुत बड़ी लाल रेखा पार करने जैसा बताया और इसे हूती मिलिशिया का एक काला कारनामा करार दिया। इससे पहले 14 सितंबर 2026 को हूती हमलों की वजह से खामिस मुशायति, आभा और ताइफ शहरों में कुल 13 नागरिक घायल हो गए थे। लगातार हो रही इन वारदातों के कारण सऊदी अरब को मजबूरी में अपने ईस्ट-पश्चिम पाइपलाइन से तेल के जहाजों का संचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है, क्योंकि रियाद और मदीना क्षेत्रों में ड्रोन हमले किए गए थे।
क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चल रही इन बैठकों में CENTCOM प्रमुख एडमिरल Brad Cooper की भूमिका बहुत अहम रही है। उन्होंने जेद्दा में सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman Al Saud से मुलाकात की थी। इसके अलावा, CENTCOM के प्रवक्ता Tim Hawkins ने जर्मनी में हुई एक गुप्त सैन्य बैठक की पुष्टि की है। इस बैठक में इसराइल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और मिस्र के बड़े सैन्य कमांडर शामिल हुए थे। हालांकि सऊदी अरब चाहता था कि अमरीका सीधे तौर पर हूती ठिकानों पर हमले करे, लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके बजाय अमरीका ने केवल खुफिया जानकारी और सटीक निशाने की पहचान में मदद देने का फैसला किया.
क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में बदलाव
सऊदी अरब को मिलने वाली यह सैन्य मदद पूरी तरह से खुफिया जानकारी साझा करने तक ही सीमित है। इसराइल की सेना ने सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने से मना कर दिया है और एक बड़े अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय गठबंधन के तहत काम करने की सलाह दी है। इसराइल इस मामले में इसलिए भी मदद कर रहा है क्योंकि उसे हूती मिलिशिया के बढ़ते प्रभाव से चिंता है। हूती विद्रोहियों ने पेरिम द्वीप जैसे रणनीतिक इलाकों पर कब्जा कर लिया है और बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में एक बहुत बड़ा बदलाव दिखाता है। सऊदी अरब इस दौरान मिस्र और यूनाइटेड किंगडम के साथ भी संपर्क में है, जहां यूके ने देश में अपने सैन्य सलाहकार भेजने का पक्का वादा किया है। इस पूरे घटनाक्रम का असर उन सभी लोगों और कामगारों पर भी पड़ सकता है जो खाड़ी देशों में रहते हैं या यात्रा करते हैं, क्योंकि सुरक्षा हालात बदलने से उड़ानों और व्यापार पर असर पड़ता है।