सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला, 13 नागरिक घायल और कड़ा जवाब देने का ऐलान.

सऊदी अरब के कई रिहायशी इलाकों को हाल ही में निशाना बनाया गया है, जिसके बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल साफ देखा जा रहा है। 14 सितंबर 2026 को हुए इन हमलों में देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी नुकसान की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद से आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं और सरकार ने भी इस पर बहुत सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
कमीज मुशैत, आभा और ताइफ पर हुए भीषण हमले
हूती विद्रोहियों की तरफ से दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों ने खमीस मुशैत, आभा और ताइफ जैसे प्रमुख शहरों को अपनी चपेट में ले लिया। इन हमलों की वजह से कुल 13 नागरिक घायल हो गए हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। इसके अलावा, इन हमलों में सात घरों और दो वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। आम बस्तियों पर इस तरह के हमलों ने लोगों की नींद उड़ा दी है और हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है।
अधिकारियों का कड़ा बयान और सरकारी कदम
यमन में शांति और वैधता बहाल करने वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे एक कायराना और जानबूझकर किया गया कृत्य बताया है। गठबंधन ने जोर देकर कहा है कि वह देश की सीमाओं और नागरिकों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इन घटनाओं के तुरंत बाद, सऊदी सिविल डिफेंस ने मक्का, जेद्दा, जाज़ान, ताइफ, यान्बू और अल-उला सहित कई शहरों में शुरुआती चेतावनी के सायरन बजाए और बाद में स्थिति को देखते हुए अलर्ट हटा लिया।
हूती संगठन का दावा और जवाबी कार्रवाई
दूसरी तरफ, हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल यह्या सरी ने किंग खालिद एयर बेस पर बड़े पैमाने पर हमला करने की जिम्मेदारी ली है। हूती नेताओं का कहना है कि अगर सऊदी अरब की तरफ से कोई भी जवाबी कार्रवाई की जाती है, तो उन्हें भी इसका मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य हजेम अल-असाद ने यह भी कहा कि जब तक हमले जारी रहेंगे, तब तक उनकी तरफ से भी जवाब दिया जाएगा। पिछले 24 घंटों में हूती सूत्रों के अनुसार, सऊदी युद्धक विमानों ने भी यमन के पांच प्रांतों में 54 हवाई हमले किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और मानवाधिकार के मुद्दे
इस ताजा तनाव को लेकर दुनिया भर के देशों और संगठनों ने अपनी गहरी चिंता जताई है। यूरोपीय संघ ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करने की मांग की है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय OCHA की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत से लेकर अब तक लगातार जारी संघर्ष की वजह से लगभग 125,000 लोग यानी 18,000 परिवार अपना घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी कहा है कि लाल सागर और अदन की खाड़ी में जहाजों पर किए गए हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।
लाल सागर और रणनीतिक जलमार्गों पर बढ़ता संकट
यह पूरा संघर्ष इस साल जुलाई 2026 के बाद से और ज्यादा तेज हो गया है, जब हूती लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट और महत्वपूर्ण बाब अल-मदब जलडमरूमध्य पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 20 जुलाई को उन्होंने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा कर दी थी। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इन समुद्री रास्तों की सुरक्षा को सबसे जरूरी बताया है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिडान ने भी क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए तुरंत युद्ध रोकने की अपील की है, जबकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस पूरे मामले पर आगे की चर्चा के लिए बैठक करने वाली है।