सना में सऊदी गठबंधन के हवाई हमले तेज, हूती ठिकानों पर बमबारी
सना में सऊदी गठबंधन ने हूती ठिकानों पर हवाई हमले तेज किए। रियाद एयरपोर्ट हमले के बाद टकराव गहराया, यमन सरकार का अभियान भी शुरू।

सना (यमन): यमन में चल रहा संघर्ष अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। 11 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन ने सना में हूती ठिकानों और उनके जमावड़ों पर हवाई हमले और तेज कर दिए। यह कार्रवाई एक दिन पहले रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हूती हमले के बाद हुई है, जिसमें 12 लोगों की मौत और 300 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे।
हमलों का दायरा सिर्फ़ एक इलाके तक सीमित नहीं रहा। गठबंधन की सेनाओं ने सना अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और राजधानी के मध्य इलाके बाब शुआब को निशाना बनाया। हूती संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, एक आवासीय घर पर हुए हवाई हमले में एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि एक महिला और एक बच्चे समेत छह लोग घायल हुए।
अन्य इलाकों में भी हमले
सना के बाहर भी कार्रवाई जारी रही। अमरान प्रांत के हर्फ़ सुफ़ियान ज़िले में एक मुर्गी फार्म तबाह हो गया, जबकि इब प्रांत के अल-सयानी ज़िले में दूरसंचार ढांचे को नुकसान पहुँचा। इन हमलों से साफ़ है कि संघर्ष अब सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर आम ज़िंदगी और बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच रहा है।
यह पूरा घटनाक्रम यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता वाली सरकार के 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' के शुरू होने के बाद तेज़ हुआ है। इस अभियान का मकसद सना पर फिर से नियंत्रण पाना है। इससे पहले सना एयरपोर्ट पर हुए हमलों में दो कर्मचारियों की जान जा चुकी है।
सऊदी गठबंधन ने रियाद पर हुए हमले को युद्ध अपराध करार दिया है और जवाब में निर्णायक कार्रवाई की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ़ हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने एयरलाइनों और यात्रियों को सऊदी अरब के सभी एयरपोर्ट से बचने की चेतावनी दी है। उन्होंने मक्का और मदीना के एयरपोर्ट को इससे बाहर रखा है। सरी के मुताबिक, संगठन की नीति अब भी "एयरपोर्ट के बदले एयरपोर्ट, नाकेबंदी के बदले नाकेबंदी और तनाव के बदले तनाव" की है।
इस टकराव पर दुनिया की नज़र भी टिकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे हूती विद्रोहियों के खिलाफ़ हमलों में सीधे सैन्य भागीदारी पर विचार कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने बढ़ते तनाव की निंदा की है। वहीं पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की समेत कई देशों ने एक संयुक्त