सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को टालने में निभाई अहम कूटनीतिक भूमिका.

सऊदी अरब के पूर्व इंटेलिजेंस प्रमुख Prince Turki Al-Faisal ने अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में बढ़े सैन्य तनाव को रोकने के लिए देश के Crown Prince Mohammed bin Salman की जमकर तारीफ की है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी है कि क्राउन प्रिंस ने अपनी कुशल कूटनीति से दोनों देशों के बीच संभावित बड़े युद्ध और हमलों को टालने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस पूरी कूटनीतिक पहल के दौरान क्राउन प्रिंस ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump, क्षेत्रीय मध्यस्थों और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा, ताकि किसी भी तरह की बड़ी सैन्य कार्रवाई को समय रहते रोका जा सके।
तनाव को कम करने के लिए हुई थी सीधी बातचीत
यह पूरी कूटनीति घटनाक्रम उस समय सक्रिय हुआ जब दोनों देशों के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए थे। 1 अगस्त 2026 को क्राउन प्रिंस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सीधी बातचीत की थी और ईरान पर संभावित हवाई हमलों को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई थी। उन्होंने अमेरिका से संयम बरतने की अपील की थी ताकि पूरे खाड़ी क्षेत्र में शांति बनी रहे। इसके बाद ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी 2 अगस्त 2026 को चेतावनी दी थी कि अगर वॉशिंगटन या उसके सहयोगी देश किसी भी तरह की आक्रामकता दिखाते हैं, तो तेहरान की तरफ से उसका मुंहतोड़ और बराबर का जवाब दिया जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री ने उस दौरान सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के अपने समकक्षों के साथ फोन पर बातचीत भी की थी।
क्षेत्रीय सुरक्षा और बातचीत का दौर
क्षेत्रीय शांति के लिए कतर के प्रधानमंत्री ने भी 27 अगस्त 2026 को तेहरान का दौरा किया था और वहां के राष्ट्रपति व विदेश मंत्री से मुलाकात की थी। इस बैठक में मुख्य तौर पर तनाव को कम करने के उपायों और होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही के लिए एक नए ईरान-ओमान प्रस्ताव पर चर्चा की गई थी। यह सारे घटनाक्रम उस समय सामने आए जब जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 60-दिन का समझौता समाप्त हो चुका था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 26 अगस्त 2026 को यह बयान दिया था कि वह ईरान के साथ सीधी बातचीत शुरू करने की जल्दी में नहीं हैं। इसके बावजूद, सऊदी कैबिनेट ने 5 अगस्त 2026 को हुई बैठक में, जिसकी अध्यक्षता खुद क्राउन प्रिंस ने की थी, यह स्पष्ट किया कि क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने का एकमात्र मुख्य जरिया केवल बातचीत ही है।