सऊदी अरब ने ओआईसी की बैठक में की फिलिस्तीन का समर्थन करने की बात, अल-अक्सा मस्जिद को लेकर कही बड़ी बात।

Aanya27 August 20262 min read43 viewsSaudi
सऊदी अरब ने ओआईसी की बैठक में की फिलिस्तीन का समर्थन करने की बात, अल-अक्सा मस्जिद को लेकर कही बड़ी बात।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan ने 27 अगस्त 2026 को जेद्दाह में इस्लामिक सहयोग संगठन यानी OIC के विदेश मंत्रियों की परिषद की एक खास बैठक को संबोधित किया। इस बैठक में मौजूदा क्षेत्रीय हालातों पर खुलकर बात की गई और यह जोर दिया गया कि इस्लामिक देशों को आपस में मिलकर एक मजबूत एकजुटता दिखाने की बहुत जरूरत है। विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि आने वाले समय में इस संगठन के अंदर बड़े और गंभीर सुधार करने की सख्त जरूरत है ताकि यह इस्लामिक दुनिया की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतर सके।

सऊदी अरब की फिलिस्तीन को लेकर साफ नीति

सऊदी विदेश मंत्री ने अपने संबोधन के दौरान इस बात को फिर से दोहराया कि उनका देश हमेशा की तरह फिलिस्तीन के मुद्दे पर पूरी मजबूती के साथ खड़ा रहेगा। सऊदी अरब ने हमेशा फिलिस्तीन के लोगों का साथ दिया है और आगे भी OIC के माध्यम से इस्लामिक दुनिया की भलाई के लिए पूरी ईमानदारी से काम करता रहेगा। इसके अलावा उन्होंने गाजा में राहत सामग्री यानी मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट के लगातार पहुंचाने की सख्त जरूरत पर भी जोर दिया ताकि वहां के बेकसूर लोगों को समय पर मदद मिल सके।

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अल-अक्सा मस्जिद के बंटवारे को लेकर कड़ी चेतावनी

बैठक में बोलते हुए सऊदी विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan ने अल-अक्सा मस्जिद को लेकर एक बहुत बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब अल-अक्सा मस्जिद के समय या जगह के किसी भी तरह के बंटवारे यानी temporal or spatial division की कोशिशों को पूरी तरह से खारिज करता है। इस तरह की किसी भी बात को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ओआईसी की बैठक का मुख्य एजेंडा और नया नेतृत्व

इस खास बैठक के एजेंडे में फिलिस्तीन से जुड़े ताजा हालात पर चर्चा करने के अलावा OIC के लिए एक नए महासचिव का चुनाव करना भी शामिल था। यह नया महासचिव मौजूदा महासचिव Mr. Hussein Ibrahim Taha की जगह लेगा जिनका कार्यकाल आधिकारिक तौर पर इस साल नवंबर के महीने में समाप्त होने जा रहा है। इस पूरी बैठक का मुख्य उद्देश्य इस्लामिक देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाना और क्षेत्रीय शांति के लिए मिलकर ठोस कदम उठाना था।

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