Slovenia में इसराइल के पहले दूतावास के खिलाफ फूटा गुस्सा, 2000 लोगों ने किया जोरदार प्रदर्शन.

स्लोवेनिया (Slovenia) की राजधानी जुब्लिजाना (Ljubljana) में उस समय भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला जब हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। यह पूरा विरोध प्रदर्शन इसराइल (Israel) के पहले रेजिडेंट दूतावास की शुरुआत के खिलाफ किया गया था। इस प्रदर्शन में लगभग 2,000 लोग शामिल हुए जो 9 सितंबर 2026 को सड़कों पर जमा हुए थे। प्रदर्शनकारियों का यह गुस्सा देश की बदलती विदेश नीति और इसराइल के साथ बढ़ते रिश्तों को लेकर था। इस कार्यक्रम का आयोजन फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन 'मूवमेंट फॉर द राइट्स ऑफ द पेलिस्टीनियन पीपल', छात्र समूहों और वामपंथी विपक्षी दलों ने मिलकर किया था। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जमकर नारेबाजी की और दूतावास को बंद करने की मांग की।
सड़क का नाम बदलने की मांग और तीखा विरोध
प्रदर्शनकारियों ने स्लोवेनिया की सरकार और जुब्लिजाना शहर की सरकार के सामने एक अनोखी मांग रखी है। उन्होंने शहर के प्रशासन को एक याचिका सौंपी है जिसमें डिमिचेवा स्ट्रीट (Dimiceva Street), जहां पर यह नया दूतावास खुला है, उसका नाम बदलकर 'फिलिस्तीन स्ट्रीट' (Palestine Street) करने को कहा गया है। इस प्रस्ताव पर अक्टूबर 2026 में एक नगर पालिका आयोग द्वारा विचार किए जाने की उम्मीद है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें हैं कि इस दूतावास को तुरंत बंद किया जाए, इसराइल के साथ सभी आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते खत्म किए जाएं, देश पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं और स्लोवेनिया को नाटो (NATO) संगठन से बाहर कर लिया जाए। लोगों का मानना है कि ऐसे कदम उठाने से देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब हो रही है और वे युद्ध के समय में इस तरह के समझौतों के बिल्कुल खिलाफ हैं।
राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप और महाभियोग की तैयारी
यह पूरा कूटनीतिक बदलाव स्लोवेनिया के प्रधानमंत्री Janez Jansa की मध्य-दक्षिणपंथी सरकार के सत्ता में आने के बाद देखने को मिला है, जिसने इसी साल मार्च 2026 में कार्यभार संभाला था। प्रधानमंत्री जान्शा ने साफ कहा है कि इस कदम का मकसद पिछली सरकारों के मुकाबले देश की विदेश नीति को सामान्य बनाना है। इस उद्घाटन समारोह में इसराइल के विदेश मंत्री Gideon Saar भी विशेष रूप से शामिल हुए थे। उन्होंने इस दिन को एक ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि इसराइल पश्चिमी सभ्यता का एक मजबूत गढ़ है जो यूरोपीय सुरक्षा को बढ़ावा देता है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृषि, चिकित्सा और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने की बात कही। स्लोवेनिया के विदेश मंत्री Tone Kajzer ने भी गिदोन सार की इस यात्रा को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि पिछले 16 वर्षों में किसी इसराइली विदेश मंत्री की यह पहली स्लोवेनिया यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच नए संबंधों की शुरुआत करती है। हालांकि, इस फैसले के बाद देश के भीतर राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है और सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। दूतावास खुलने के वाले दिन ही दो मध्य-वामपंथी विपक्षी दलों, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री Robert Golob के नेतृत्व वाली लिबरल फ्रीडम मूवमेंट और द लेफ्ट पार्टी शामिल है, ने संसद में प्रधानमंत्री जान्शा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए एक आधिकारिक याचिका दाखिल कर दी। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मौजूदा सरकार पूरी तरह से केवल इसराइल के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है। पूर्व प्रधानमंत्री रॉबर्ट गोलोब ने मौजूदा प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार अंतरराष्ट्रीय कानून के रास्ते से भटक गई है। वहीं, देश के पूर्व राष्ट्रपति Danilo Turk ने भी चेतावनी दी है कि स्लोवेनिया धीरे-धीरे इसराइली नीति का एक हथियार बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक Andraz Zorko ने भी यह बात कही कि सरकार का यह नीतिगत बदलाव आम जनता की उस सोच के बिल्कुल विपरीत है जो इसराइल के साथ करीबी रिश्ते रखने के मामले में काफी संशय में है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा जैसे देश भी वेस्ट बैंक में इसराइली बस्तियों के खिलाफ लगातार कड़े कदम उठा रहे हैं।