नेपाल में बाढ़ के बाद लापता तीर्थयात्री टेरीसिया गोविंद के लिए परिवार ने शुरू की तलाश, डीएनए सैंपल दिए.

दक्षिण अफ्रीका का एक परिवार नेपाल पहुँच चुका है और अपने लापता 33 साल की तीर्थयात्री Terricia Govender की तलाश में जुट गया है। यह परिवार पिछले सात दिनों से भयानक बाढ़ के बाद से अपनी बेटी को ढूंढ रहा है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26-27 अगस्त 2026 को आए बर्फ और चट्टान के भयानक हिमस्खलन और बाढ़ की वजह से यह आपदा आई थी। परिवार अब भी इस उम्मीद में है कि उनकी बेटी सुरक्षित मिल जाएगी, जिसे उसकी माँ एक फाइटर बताती हैं। लापता महिला की माँ Linda Govender, उनके भाई Nadarajan Govender और पारिवारिक दोस्त Sashin Maharaj के साथ 3 सितंबर 2026 को नेपाल के लिए रवाना हुईं ताकि वे खुद वहां जाकर खोजबीन में मदद कर सकें, भले ही प्रशासन की तरफ से लगातार बाढ़ को लेकर चेतावनी जारी की जा रही है।
तीर्थयात्रा के दौरान हुआ हादसा
Terricia Govender ईशा फाउंडेशन (Isha Foundation) की तरफ से आयोजित 13 से 14 दिनों की कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। परिवार के लोगों से उनकी आखिरी बार बात 25 अगस्त 2026 को हुई थी। उस समय वह चीन की सीमा पर स्थित ग्यारिंग इमीग्रेशन ऑफिस (Gyirung Immigration Office) के पास थीं, जो बाद में आई बाढ़ की वजह से पूरी तरह तबाह हो गया। उन्हें इस यात्रा के बाद 28 अगस्त 2026 को वापस दक्षिण अफ्रीका लौटना था। वह उन छह दक्षिण अफ्रीकी नागरिकों में शामिल हैं जो इस आपदा के बाद से लापता हैं, जबकि उनके साथ गए नौ अन्य लोग सुरक्षित अपने घर लौट चुके हैं। अन्य लापता दक्षिण अफ्रीकी नागरिकों में Surendranath Maharaj (74), Anita Devi Maharaj (67), Vivaganathan Tony Pillay (66), Janet Pillay (56) और Bavila Ramjee (43) शामिल हैं।
सरकारी आंकड़े और राहत कार्य
नेपाल के विदेश मंत्रालय (Ministry of Foreign Affairs) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन भयानक बाढ़ और आपदाओं की वजह से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,259 हो गई है और 5,083 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। 2 सितंबर 2026 तक लगभग 1,114 शवों को बाहर निकाला जा चुका है और 300 से ज्यादा विदेशी नागरिकों समेत कुल 11,993 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। हालांकि, 34 अलग-अलग देशों के लगभग 590 विदेशी नागरिक अभी भी लापता हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी नेपाल के विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग पर देखी जा सकती है। भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्च कमिश्नर प्रोफेसर अनिल सूक्लाल (Professor Anil Sooklal) ने बताया कि इस इलाके का पहाड़ी और कठिन रास्ता राहत और बचाव कार्यों में बहुत बड़ी रुकावट बन रहा है।
परिवार ने दिए डीएनए सैंपल
लापता लोगों की पहचान को आसान बनाने के लिए गोविंद परिवार ने नेपाली अधिकारियों को अपने डीएनए सैंपल (DNA samples) दे दिए हैं, जिनकी जांच रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर मिलने की बात कही गई है। काठमांडू का रोटरी क्लब (Rotary Club of Kathmandu) और रोटरी इंटरनेशनल इस मुश्किल वक्त में रहने की व्यवस्था और लापता लोगों के पोस्टर बांटने जैसे कामों में पूरी मदद कर रहा है। दक्षिण अफ्रीका की संस्था गिफ़्ट ऑफ़ द गिवर्स (Gift of the Givers) की रेस्क्यू टीम भी अपनी तरफ से तैयार है, लेकिन पानी का स्तर खतरनाक होने की वजह से उन्हें अभी मैदान में उतरने नहीं दिया गया है। Linda Govender लगातार ईशा फाउंडेशन और दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध और सहयोग विभाग (Department of International Relations and Cooperation) के संपर्क में हैं ताकि उन्हें अपनी बेटी के बारे में कोई भी नई खबर मिल सके, जबकि लगातार हो रही मानसूनी बारिश से इलाके में खतरा अभी भी बना हुआ है।