सियोल में अमेरिकी दूतावास के बाहर प्रदर्शन, दक्षिण कोरियाई नौसेना के हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित तैनाती पर मचा बवाल।

Sushma Kumari9 September 20262 min read34 viewsUAE
सियोल में अमेरिकी दूतावास के बाहर प्रदर्शन, दक्षिण कोरियाई नौसेना के हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित तैनाती पर मचा बवाल।

बुधवार, 9 सितंबर 2026 को दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में अमेरिकी दूतावास के पास लगभग 60 प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए। इन लोगों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में दक्षिण कोरियाई नौसेना के शामिल होने की संभावना का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारे लगाए और कहा कि वे अपने युवाओं को मौत के समुद्र में नहीं भेज सकते। उन्होंने वाशिंगटन द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को अवैध बताया और इस पर कड़ी आपत्ति जताई।

तनाव का माहौल और कूटनीतिक गतिविधियां

यह पूरा विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल और तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। 8 सितंबर 2026 को दक्षिण कोरियाई रक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की थी कि यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात में हालात का जायजा लेने के लिए एक जांच दल भेजा गया है। मंत्रालय ने साफ किया कि इस मिशन का मकसद सिर्फ स्थिति का आकलन करना है और इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सेना तैनात की जा रही है। यह जांच दल 7 सितंबर 2026 वाले हफ्ते में वापस लौटने वाला है। इसके अलावा, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae Myung और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने 8 सितंबर को पेरिस में मुलाकात की और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा की। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Wi Sung-lac ने स्पष्ट किया कि इन बैठकों में सैनिकों की तैनाती को लेकर कोई बात नहीं हुई और सियोल अभी अपनी सुरक्षा भागीदारी पर विचार कर रहा है।

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आर्थिक दबाव और तेल आयात पर असर

यह पूरा भू-राजनीतिक दबाव अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी। इस संघर्ष की वजह से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर बहुत बुरा असर पड़ा है। दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था के लिए यह जलमार्ग बहुत ज्यादा जरूरी है। पिछले साल दक्षिण कोरिया ने अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 61 प्रतिशत और नेफ्था आयात का 54 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से मंगाया था। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लगातार सियोल पर क्षेत्रीय सुरक्षा में योगदान देने के लिए दबाव बना रहे हैं और इस मामले को कोरियाई प्रायद्वीप पर होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों से जोड़ रहे हैं।

ईरान की कड़ी चेतावनी

इस पूरे मामले पर ईरान ने भी कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। 7 सितंबर 2026 को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने कहा कि फारस की खाड़ी या हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी विदेशी सैन्य तैनाती को हमलावर का सीधा समर्थन माना जाएगा और इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अमेरिकी ताकतों द्वारा ईरानी तेल टैंकरों पर हमले और ईरान द्वारा क्षेत्र में एक अमेरिकी मानवरहित पनडुब्बी को पकड़ने के दावों के बाद से क्षेत्र में तनाव चरम पर है। दक्षिण कोरियाई सरकार ने यह भी कहा है कि सेना की तैनाती से जुड़ा कोई भी अंतिम फैसला संसद की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाएगा और इससे देश की सैन्य तैयारी पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए।

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