South Korea: Hormuz Strait में मिलिट्री भेजने पर भड़के लोग, सियोल में अमेरिका के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन.

दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में इन दिनों हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं क्योंकि वहां की सरकार पर अमेरिका का साथ देने के लिए होरमुज जलडमरूमध्य में सेना भेजने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संभावित सैन्य तैनाती के विरोध में कोरियाई सड़कों पर लोग उतर आए हैं और सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। हाल ही में 9 सितंबर 2026 को देश के विभिन्न हिस्सों से आए नागरिक समूहों ने अमेरिकी दूतावास के बाहर इकट्ठा होकर जोरदार प्रदर्शन किया और बाद में राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ मार्च किया। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि इस तरह का कदम उठाना किसी गैरकानूनी युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने जैसा है जिससे देश के सैनिकों और नागरिकों की जान को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
जनता की राय बंटी लेकिन विरोध का पलड़ा भारी
इस गंभीर मुद्दे पर आम जनता की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं है लेकिन आंकड़े साफ बताते हैं कि ज्यादातर लोग इस सैन्य तैनाती के खिलाफ नजर आ रहे हैं। नेशनल बैरोमीटर सर्वे द्वारा 7 सितंबर से 9 सितंबर 2026 के बीच देश के 1,002 वयस्क नागरिकों पर एक सर्वेक्षण कराया गया था। इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि लगभग 45 प्रतिशत लोग होरमुज में सेना भेजने के सख्त खिलाफ हैं जबकि समर्थन करने वालों का आंकड़ा केवल 36 प्रतिशत पर सिमट गया है। जब इस सर्वे की गहराई से जांच की गई तो यह बात सामने आई कि देश के उदारवादी नागरिकों और 40 से 50 वर्ष की उम्र के लोगों के बीच इसका विरोध सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है, जहां यह आंकड़ा क्रमशः 54 प्रतिशत और 59 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके अलावा डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करने वाले लोगों में भी लगभग 55 प्रतिशत जनता इस फैसले के पक्ष में बिल्कुल नहीं है।
ईरान की तरफ से कड़ी चेतावनी
दक्षिण कोरिया के इस संभावित कदम पर ईरान की सरकार ने भी बहुत सख्त रुख अपनाया है और तेहरान की तरफ से लगातार गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनियां दी जा रही हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि यदि दक्षिण कोरियाई सेना इस क्षेत्र में कदम रखती है तो इसे सीधे तौर पर आक्रामक युद्ध का समर्थन माना जाएगा और इसके गंभीर नतीजे होंगे। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह इस जलडमरूमध्य के आसपास के इलाके को एक प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर देगा जिससे वहां जहाजों और विमानों की आवाजाही पर कड़ा प्रतिबंध लग जाएगा।
सरकार का आधिकारिक पक्ष और समीक्षा
दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यंग की सरकार पर अमेरिकी प्रशासन की ओर से सुरक्षा में सहयोग देने का भारी दबाव बना हुआ है लेकिन आधिकारिक तौर पर सरकार का कहना है कि अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। रक्षा मंत्रालय ने उन सभी मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें यह दावा किया गया था कि अमेरिका ने इस मामले में कार्रवाई करने के लिए नवंबर तक की आखिरी तारीख तय की है। अपनी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए सियोल प्रशासन ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात में एक तथ्यान्वेषी मिशन भेजा था ताकि वहां के जमीनी और परिचालन हालात का जायजा लिया जा सके, हालांकि अधिकारियों ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि इस दौरे को सेना भेजने की पक्की प्रतिबद्धता बिल्कुल न समझा जाए। देश के कानून के नियमों के मुताबिक किसी भी विदेशी जमीन पर सैन्य टुकड़ी भेजने से पहले नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मंजूरी, कैबिनेट का प्रस्ताव और नेशनल एसेंबली की सहमति होना अनिवार्य है। इस समय सरकार जिन विकल्पों पर विचार कर रही है उनमें मुख्य रूप से P-8A Poseidon समुद्री गश्ती विमान, नौसेना का साजो-सामान ढोने वाला जहाज ROKS Soyang और नेवी के विशेष बम निरोधक दस्ते के जवानों को तैनात करने की योजना शामिल है।