Strait of Hormuz में दो जहाजों पर बड़ा हमला, भारतीय क्रू मेंबर्स फंसे और बढ़ गई चिंता.

गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz के पास एक बड़ी घटना सामने आई, जहां भारतीय क्रू मेंबर्स को ले जा रहे दो विदेशी जहाजों को निशाना बनाया गया। इस घटना के बाद से खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और उनके परिवारों की चिंता काफी ज्यादा बढ़ गई है। इस क्षेत्र में लगातार बढ़ते तनाव के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय समुद्री कर्मचारी इन खतरनाक समुद्री रास्तों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
दो अलग-अलग जहाजों पर हुआ हमला
पहली घटना में पनामा के झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर MT Basrah Energy को एक प्रोजेक्टाइल यानी मिसाइल जैसी चीज से निशाना बनाया गया। यह हमला तब हुआ जब यह विशाल जहाज जलडमरूमध्य के बाहर पूर्व दिशा की तरफ यात्रा कर रहा था। इस 333 मीटर लंबे टैंकर के फनल वाले हिस्से में यह चीज लगी, गनीमत यह रही कि इसमें कोई बड़ा ढांचागत नुकसान नहीं हुआ। भारतीय समुद्री प्रशासन निदेशालय ने इस बात की पुष्टि की है कि जहाज पर कुल 22 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 14 भारतीय नागरिक भी शामिल थे और सभी पूरी तरह से सुरक्षित हैं। बाद में इस जहाज को फुजईरा बंदरगाह पर सुरक्षित रूप से डॉक कर दिया गया।
दूसरी घटना ओमान के खसाब बंदरगाह के पास हुई, जहां टोगो के झंडे वाले प्रोडक्ट टैंकर Trend को एक ड्रोन ने टक्कर मार दी। यह जगह मुसंदम प्रायद्वीप से लगभग 16 नॉटिकल मील उत्तर पूर्व में स्थित है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने दावा किया कि उनके सुरक्षा बलों ने इस जहाज पर हमला किया और इसे हिरासत में ले लिया। उनका आरोप था कि यह जहाज बिना अनुमति के उस रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने केवल एक सुरक्षा घटना होने की पुष्टि की, लेकिन किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा और निकासी पर बड़ा असर
मौजूदा हालात को देखते हुए यह पता चला है कि अभी भी लगभग 153 भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं। ये सभी नाविक कुल 14 जहाजों पर तैनात हैं, जिनमें 6 भारतीय झंडे वाले जहाज और 8 विदेशी झंडे वाले ऐसे जहाज शामिल हैं जिनमें भारत की रुचि जुड़ी हुई है। राहत की बात यह है कि इनमें से 10 जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने यानी निकासी के लिए चिह्नित कर लिया गया है। पूरी दुनिया के मर्चेंट नेवी यानी व्यापारिक जहाजों के कार्यबल में अकेले भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत है, जो यह बताता है कि वैश्विक समुद्री व्यापार में हमारे देश के लोग कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
जब से अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच आपसी संघर्ष बढ़ा है, तब से मध्य पूर्व में हालात बहुत खराब हो चुके हैं। इस संघर्ष की वजह से अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 16 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं जो मध्य पूर्व में मारे गए। इनमें से 10 लोग अकेले नाविक थे, जबकि 12 अन्य भारतीय कतर में एक गैस प्लांट में हुए भीषण विस्फोट में अपनी जान गंवा बैठे थे। इसके अलावा, बिहार के रहने वाले एक ओइलर सुमित कुमार सिंह भी पिछले महीने यानी 13 सितंबर को MT El Gaia जहाज पर हुए हमले के बाद से लापता हैं और उनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।
प्रशासन के आदेशों के बावजूद जारी है जहाजों की आवाजाही
शिपिंग के महानिदेशक यानी डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग की तरफ से पहले ही साफ निर्देश दिए जा चुके हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते नए जहाजों को नहीं भेजा जाना चाहिए। इसके बावजूद कई शिपिंग कंपनियां लगातार इस खतरनाक क्षेत्र में अपने जहाजों का संचालन कर रही हैं। सुरक्षा के लिहाज से अब तक 4,000 से ज्यादा भारतीय नाविकों को इस संकटग्रस्त इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
क्षेत्र में लगातार जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल का यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। फुजईरा को इस समय आपातकालीन एंकरिंग यानी ठहरने की जगह के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि सोहर के पास जहाजों के बीच तेल का आदान-प्रदान किया जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, बहरीन और ओमान में रहने वाले आम भारतीय कामगार इन सभी जोखिमों के बीच अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए मजबूर हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों सहित पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस क्षेत्रीय अस्थिरता को सुलझाने के लिए लगातार बातचीत कर रहा है, ताकि वहां रह रहे प्रवासियों और कामगारों को सुरक्षित माहौल मिल सके।