Sweden Election: पैलेस्टाइन की मान्यता को रद्द करने की तैयारी में स्वीडन डेमोक्रेट्स, सितंबर चुनाव से पहले गरमाई राजनीति

स्वीडन में 13 सितंबर 2026 को होने वाले आम चुनाव से पहले राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। देश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी और दक्षिणपंथी समूह Sweden Democrats ने फलस्तीन (Palestine) की आधिकारिक मान्यता को वापस लेने के लिए अपना अभियान तेज कर दिया है। साल अक्टूबर 2014 में स्वीडन यूरोपीय संघ का पहला ऐसा देश बना था जिसने फलस्तीन को औपचारिक रूप से मान्यता दी थी। यह नीति तत्कालीन प्रधानमंत्री Stefan Lofven के नेतृत्व वाली सोशल डेमोक्रेटिक-ग्रीन पार्टी गठबंधन सरकार ने फलस्तीनी आत्मनिर्णय को बढ़ावा देने के लिए बनाई थी।
गठबंधन की राजनीति और प्रमुख मांगे
मौजूदा समय में राइट-विंड सरकार गठबंधन का हिस्सा बनने वाली पार्टी Sweden Democrats ने इस फैसले को पलटना अपनी मुख्य राजनीति बना लिया है। पार्टी के नेता Jimmie Akesson ने जनवरी 2026 में स्पष्ट किया था कि वह भविष्य की गठबंधन वार्ताओं के दौरान इस मान्यता को रद्द करने का दबाव बनाएंगे। इसके अलावा पार्टी की अन्य नीतियों में स्वीडिश दूतावास को यरुशलम (Jerusalem) स्थानांतरित करना और फलस्तीनियों को मिलने वाली सभी स्वीडिश सहायता को पूरी तरह से बंद करना शामिल है।
राजनीतिक जानकारों की राय और सरकारी रुख
राजनीतिक टिप्पणीकार Zina al-Dewany के अनुसार, चूंकि स्वीडिश विदेश नीति का निर्धारण सरकार द्वारा किया जाता है न कि किसी संसदीय मतदान के जरिए, इसलिए भविष्य की कोई भी सरकार बिना विधिवत मंजूरी के भी इस मान्यता को वापस ले सकती है। मौजूदा सरकार ने भी इस दिशा में संकेत देना शुरू कर दिया है। साल 2022 के अंत में विदेश मंत्री Tobias Billström ने 2014 की इस मान्यता को जल्दबाजी में उठाया गया और दुर्भाग्यपूर्ण कदम बताया था।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और दो-राज्य समाधान
Sweden Democrats के इस रुख के बावजूद देश की आधिकारिक सरकारी स्थिति अभी भी अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ बनी हुई है। गत 8 सितंबर 2026 को स्वीडन ने कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, आइसलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन और ब्रिटेन के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में दो-राज्य समाधान के समर्थन को फिर से दोहराया गया। गठबंधन ने फलस्तीनी भूमि के अधिग्रहण और लोगों के जबरन विस्थापन का विरोध किया, साथ ही अवैध बस्तियों से आने वाले सामानों के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने के अपने इरादे की पुष्टि भी की।
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि वामपंथी गठबंधन और दक्षिणपंथी गुट के बीच कड़ा मुकाबला होने वाला है। मानवाधिकार संगठनों जैसे Human Rights Watch ने भी मई 2026 में इजराइल और फलस्तीन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसलों को लागू करने के लिए स्वीडिश राजनीतिक दलों से सवाल किए थे, जिससे यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।