Sydney Marathon: सिडनी मैराथन में इसराइली सैनिकों को वीज़ा मिलने पर मचा बवाल, सरकार पर लग रहे हैं गंभीर आरोप.

Praggya Singh sabal31 August 20263 min read26 viewsWorld
Sydney Marathon: सिडनी मैराथन में इसराइली सैनिकों को वीज़ा मिलने पर मचा बवाल, सरकार पर लग रहे हैं गंभीर आरोप.

ऑस्ट्रियाई सरकार इस समय एक बड़े विवाद में घिर गई है क्योंकि उसने सिडनी मैराथन में हिस्सा लेने वाले दर्जनों इसराइली सैनिकों को देश का वीज़ा दे दिया है। इस फैसले के बाद से सरकार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वह इस बात का जवाब दे कि आखिर किन नियमों के तहत इन सैनिकों को वीज़ा जारी किया गया था। आलोचकों का साफ कहना है कि इस तरह की अनुमति देना अंतरराष्ट्रीय कानूनी नियमों का सीधा उल्लंघन है और इससे देश की मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं पर भी बड़े सवाल खड़े होते हैं। यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब 31 अगस्त 2026 को जनता के बीच इस पर भारी चर्चा शुरू हुई और लोग इसके खिलाफ सड़कों पर उतर आए।

सिडनी मैराथन के दौरान हुआ जोरदार विरोध प्रदर्शन

इस पूरी यात्रा के दौरान लगभग 40 इसराइली सैन्य कर्मी ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे जिनमें सेना के पूर्व सैनिक और सक्रिय सदस्य दोनों शामिल थे। इन लोगों पर गाजा, कब्जे वाले पश्चिमी तट और लेबनान में चल रहे सैन्य अभियानों में शामिल होने की बात कही जा रही है। ये सभी लोग इस समय ऑस्ट्रेलिया में इसराइली विकलांग चैरिटी संस्था शाल्वा के लिए फंड इकट्ठा करने के उद्देश्य से आए हुए हैं। लेकिन रविवार, 30 अगस्त 2026 को सिडनी मैराथन के रूट पर सैकड़ों प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो गए। इन लोगों ने हाथों में फिलिस्तीनी झंडे ले रखे थे और हमारी सड़कों पर कोई आईडीएफ नहीं और आईडीएफ को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के पास भेजो जैसे नारे लगाए। इस मैराथन आयोजन को ज़ायोनी काउंसिल ऑफ़ एनएसडब्ल्यू, एआईसीजेएसी और यूनाइटेड इसराइल अपील जैसे संगठनों का पूरा समर्थन प्राप्त था।

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मानवाधिकार संगठनों और वकीलों ने उठाए गंभीर सवाल

ऑस्ट्रेलियन पैलेस्टाइन एडवोकेसी नेटवर्क के अध्यक्ष नासिर मशनी ने इस पूरे कार्यक्रम को गाजा में चल रहे नरसंहार को खेलों के जरिए छिपाने का एक प्रयास करार दिया। उन्होंने और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इन सभी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के सैन्य रिकॉर्ड की औपचारिक जांच की जानी चाहिए। ऑस्ट्रेलियन सेंटर फॉर इंटरनेशनल जस्टिस की कार्यकारी निदेशक रावान अर्राफ ने 28 अगस्त 2026 को यह बात कही थी कि सरकार ने इन लोगों के पिछले आचरण की ठीक से जांच नहीं की जो कि अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति लापरवाही भरा रवैया दिखाता है। इस संगठन ने सरकार से औपचारिक रूप से यह अपील की है कि वह वीज़ा की स्क्रीनिंग प्रक्रिया को और ज्यादा सख्त करे और युद्ध अपराधों से जुड़े सबूतों को ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस को सौंपे।

माइग्रेशन एक्ट की धारा 501 और वीज़ा नीति पर बहस

इस पूरे कानूनी विवाद के केंद्र में माइग्रेशन एक्ट की धारा 501 आती है, जो सरकार को यह अधिकार देती है कि वह युद्ध अपराधों, नरसंहार या मानवता के खिलाफ अपराधों में शामिल होने के संदेह वाले किसी भी व्यक्ति का वीज़ा रद्द कर सकती है या देने से मना कर सकती है, भले ही इसके लिए कोई औपचारिक सजा न सुनाई गई हो। गृह विभाग का यह कहना है कि इसराइल डिफेंस फोर्सेस में सेवा देना वीज़ा न देने का कोई स्वतः आधार नहीं बनता है और सामान्य तौर पर जानकारी मांगना एक नियमित प्रक्रिया है। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं का कहना है कि चरित्र प्रमाण से जुड़े इन परीक्षणों में सरकार द्वारा दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। आलोचकों ने इस बात का भी जिक्र किया कि सरकार ने पहले मिस्र मूल के अमेरिकी हास्य कलाकार बासेम युसूफ की यात्रा को टालने के लिए उनसे बेहद कड़े चरित्र प्रमाण की जांच कराई थी, जिससे मौजूदा वीज़ा जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। अलजज़िरा की रिपोर्टर सोराया लेनी ने भी इन चिंताओं को प्रमुखता से उठाया है और यह बताया है कि कई पर्यवेक्षक सरकार के इस रुख को मानवाधिकारों के प्रति एक बड़ा विश्वासघात मानते हैं।

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