Syria का इसराइल पर बड़ा आरोप, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दौरे को बताया संप्रभुता का उल्लंघन.

बुधवार, 9 सितंबर 2026 को इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने जबाल अल-शेख यानी माउंट हर्मन का दौरा किया। इस दौरे के दौरान उनके साथ रक्षा मंत्री Israel Katz और उप चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल Tamir Yadai भी मौजूद थे, जिसके बाद सीरियाई सरकार की तरफ से बहुत तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
सीरिया के विदेश मंत्रालय की कड़ी आपत्ति
सीरिया के विदेश मंत्रालय ने एक औपचारिक बयान जारी कर इसराइल के प्रधानमंत्री के इस कदम को एक भड़काऊ कार्रवाई बताया है। मंत्रालय का कहना है कि यह सीरिया की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। दमिश्क सरकार ने इस घुसपैठ को क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरनाक escalation करार दिया है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील की गई है कि वे इसराइल को जवाबदेह ठहराएं और 1974 के डिसएंगेजमेंट समझौते का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाएं।
इसराइल का पक्ष और सुरक्षा दावे
अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि माउंट हर्मन की चोटी से लेकर यारमुक नदी तक के इलाके पर इसराइल का पूरा नियंत्रण है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इसराइल अपनी सीमा पर किसी भी आतंकी सेना को टिकने नहीं देगा और सीरिया में ईरानी सरकार को हराने के लिए उनकी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसराइल का यह भी कहना है कि इस इलाके में उसकी मौजूदगी एक अस्थायी सुरक्षा उपाय है और सीरिया की जमीन पर उसका कोई कब्जा करने का इरादा नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार आयोग की चिंताएं
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब इसके ठीक एक दिन पहले यानी 8 सितंबर 2026 को सीरिया पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग ने देश के दक्षिणी हिस्सों में इस्राइली सैन्य गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई थी। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इसराइल के कदम सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ हैं और नागरिकों को हिरासत में लेने जैसी कुछ कार्यवाहियां युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती हैं। इसके अलावा अरब देशों ने भी 27 अगस्त 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की थी कि क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए इसराइल को तुरंत अपनी सैन्य गतिविधियां रोकनी चाहिए।