नेपाल बाढ़ में फंसे तमिलनाडु के 219 तीर्थयात्री सुरक्षित रेस्क्यू, 31 अगस्त तक सभी के लौटने की उम्मीद.

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच वहां फंसे भारतीयों को निकालने का काम तेजी से चल रहा है। तमिलनाडु सरकार के मंत्री राजमोहन ने रविवार को बड़ा ऐलान किया है कि नेपाल में फंसे तमिलनाडु के 319 लोगों में से 219 नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। प्रशासन और अधिकारियों का मानना है कि ये सभी सुरक्षित बचाए गए लोग 31 अगस्त की रात तक अपने घर तमिलनाडु वापस लौट आएंगे। सरकार लगातार उन बाकी बचे 100 लोगों की तलाश में जुटी हुई है जो उसी इलाके में फंसे हुए बताए जा रहे हैं और जिनका अभी तक पूरा पता नहीं चल पाया है।
सरकार और मंत्रियों ने संभाला मोर्चा
इस बड़े बचाव अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने खास तौर पर पहल की और कई सरकारी कदम उठाए। मुख्यमंत्री ने एक मंत्रियों की टीम बनाई जिसमें राजमोहन, थेन्नारसू, आधार अर्जुन और विनोद शामिल हैं। इन सभी मंत्रियों को दिल्ली और काठमांडू में राहत और बचाव कार्यों की देखरेख के लिए भेजा गया। स्थिति पर नजर रखने और तालमेल बिठाने के लिए दिल्ली स्थित तमिलनाडु हाउस में एक विशेष वॉर रूम भी बनाया गया है ताकि हर जानकारी तुरंत साझा की जा सके और लोगों को मदद पहुंचाई जा सके।
इससे पहले 29 अगस्त को मंत्रियों नारायणसामी आनंद और डी सरथकुमार ने चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचकर बचाए गए तीर्थयात्रियों के एक अन्य जत्थे का स्वागत किया था। इस बारे में विदेश मंत्रालय यानी MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सबसे पहले 27 अगस्त को इन लोगों के सुरक्षित होने की आधिकारिक पुष्टि की थी, जिसके बाद से राहत कार्यों में और तेजी आ गई थी। इस पूरी प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी विदेश मंत्रालय की आधिकारिक ब्रीफिंग में भी साझा की गई है।
नेपाल में राहत कार्य और परिवारों की चिंता
नेपाल में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और वहां की सरकार ने भारत और चीन से तकनीकी मदद मांगी है। नेपाल ने फॉरेंसिक सपोर्ट और टनल में बचाव कार्य करने वाले उपकरणों की मांग की है ताकि मलबे और पानी में फंसे लोगों को निकाला जा सके। इस समय नेपाल की सेना और पुलिस के 15,000 से ज्यादा जवान इस मुश्किल बचाव अभियान में दिन-रात जुटे हुए हैं। दूसरी तरफ, जिन परिवारों के लोग अभी भी लापता हैं, वे सरकार से सुरक्षित बचाए गए लोगों की सही और सत्यापित सूची की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें अपनों के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है। इस मामले को लेकर मद्रास हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है ताकि सरकार और तेजी से काम करे और बाकी बचे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।