तेhran और Beijing के बीच मजबूत हुए रिश्ते, ईरान ने कहा अमेरिका के दबाव से नहीं पड़ेगा असर.

Praggya Singh sabal7 September 20262 min read19 viewsWorld
तेhran और Beijing के बीच मजबूत हुए रिश्ते, ईरान ने कहा अमेरिका के दबाव से नहीं पड़ेगा असर.

तेहरान के अधिकारियों ने 7 सितंबर 2026 को साफ किया कि ईरान और चीन के बीच के कूटनीतिक रिश्ते बहुत अच्छे और स्थिर बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है। अल जज़ीरा इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक, बगई ने यह बयान दिया है, जिससे यह साफ होता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक दबाव के बाद भी दोनों देशों की साझेदारी पर कोई आंच नहीं आई है। यह रिश्ता पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है और दोनों देशों के अधिकारी आपसी सहयोग को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं।

उच्च स्तरीय बैठकों का दौर और नई सुरक्षा रूपरेखा

यह आधिकारिक बयान सितंबर 2026 के शुरुआती दिनों में हुई लगातार उच्च-स्तरीय बैठकों और नीतियों के तालमेल के बाद आया है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबफ, जो चीन मामलों के विशेष दूत भी हैं, ने 5 सितंबर 2026 को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पश्चिम एशिया में एक नई सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े चार सूत्री प्रस्ताव का समर्थन किया। गालिबफ ने इस बात पर जोर दिया कि यह ढांचा तेहरान की पुरानी सोच के बिल्कुल मेल खाता है, जिसके तहत क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल वहां के स्थानीय देशों के पास ही होनी चाहिए।

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मीडिया रिपोर्टों पर ईरान का स्पष्टीकरण

दोनों देशों के बीच के रिश्तों के दायरे को लेकर ईरान के चीन मामलों के विशेष प्रतिनिधि कार्यालय ने 2 सितंबर 2026 को एक खंडन जारी किया था। मीडिया में कुछ ऐसी खबरें चल रही थीं जिनमें दावा किया गया था कि बीजिंग ने अपने संबंधों को बढ़ाने के लिए कुछ खास शर्तें रखी हैं। कार्यालय ने इन खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह व्यापक रणनीतिक साझेदारी पूरी तरह से आपसी सम्मान और साझा हितों पर टिकी हुई है।

पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना करने की रणनीति

अगस्त 2026 के पूरे महीने के दौरान, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों और संयुक्त परियोजनाओं को तेजी से लागू करने की जरूरत है। अरागची ने बताया कि तेहरान और बीजिंग के बीच गहरे होते रिश्ते पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का मुकाबला करने और एक निष्पक्ष, बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने के लिए एक बहुत बड़ा हथियार साबित हो रहे हैं। दूसरी ओर, बीजिंग ने भी लगातार अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया है और कहा है कि तेहरान के साथ उसका सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में आता है तथा वह अपने वैध राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना जारी रखेगा।

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