Tehran में गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और अमेरिकी प्रतिबंधों से जीना हुआ मुश्किल, जानिए पूरा हाल.

Aanya29 August 20262 min read33 viewsWorld
Tehran में गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और अमेरिकी प्रतिबंधों से जीना हुआ मुश्किल, जानिए पूरा हाल.

तेहरान के लोगों को इन दिनों बहुत ज्यादा आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि युद्ध और अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से तोड़ दिया है। 29 अगस्त 2026 को तेहरान के नागरिकों ने अल जजीरा को बताया कि नौकरी जाने और आसमान छूती कीमतों ने आम जिंदगी को तबाह कर दिया है। मरियम नाम की स्थानीय निवासी ने बताया कि जब से यह संघर्ष शुरू हुआ है, तब से घर चलाना और रोजमर्रा का खर्च उठाना बहुत मुश्किल हो गया है।

ईरान की मुद्रा और महंगाई का बुरा हाल

ईरान की करेंसी ईरानी रियाल बहुत ज्यादा गिर चुकी है और यह एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 million rials से भी ज्यादा नीचे चली गई है। सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में शहरी इलाकों में खुदरा महंगाई दर 84.4% तक पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह सालाना आधार पर 66% थी। खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर बढ़कर 128% हो गई है और ग्राहकों के लिए चीजें पिछले साल के मुकाबले लगभग 88% महंगी हो गई हैं। परिवारों का कहना है कि हर हफ्ते का किराने का सामान खरीदने का खर्च 20% से 30% तक बढ़ गया है। इस साल न्यूनतम मजदूरी में 60% की बढ़ोतरी होने के बाद भी लोगों की खरीदने की ताकत लगातार कम हो रही है।

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सरकारी अधिकारियों के अलग-अलग बयान

सरकार के बड़े अधिकारियों ने इस संकट को लेकर अलग-अलग बातें कही हैं। ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने यह माना है कि युद्ध, प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से देश की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं और इस लड़ाई को खत्म करना उनकी पहली प्राथमिकता है। इसके उलट, सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती ने 27 अगस्त को दावा किया कि ईरान ने अत्यधिक महंगाई यानी हाइपरइफ्लेशन से खुद को बचा लिया है और उन्होंने बाजार में डर के माहौल के लिए अमेरिका के मानसिक दबाव को जिम्मेदार ठहराया। वहीं दूसरी ओर, प्लान एंड बजट ऑर्गेनाइजेशन के प्रमुख हामिद पोरमोहम्मदी ने पिछले पांच महीनों में 700 trillion tomans के बहुत बड़े घाटे का खुलासा किया और सितंबर से अक्टूबर के बीच बजट पर और अधिक दबाव पड़ने की चेतावनी दी।

ईंधन की कमी और प्रशासनिक कदम

इस अस्थिरता के बीच पेट्रोल-डीजल की कमी ने स्थिति को और खराब कर दिया है, जहां पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग रही हैं क्योंकि देश के अंदर रोजाना पेट्रोल की खपत 135 million liters है जबकि उत्पादन केवल 112-121 million liters ही हो रहा है। नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से बाहर से आने वाला आयात बंद है, जिसके कारण अधिकारियों को रियायती कोटे में कटौती करनी पड़ी है। सर्वोच्च नेता अятоल्लाह मोजतबा खामेनेई ने अधिकारियों से बाजार को संभालने और बेरोजगारी पर ध्यान देने को कहा है। सरकार की प्रवक्ता फातेमेह मोहजेरानी ने जानकारी दी है कि गरीबी से जुड़े आंकड़े अब सुरक्षा प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं और इन्हें जारी करने के लिए सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से अनुमति लेनी होगी।

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