अमेरिका और ईरान में बढ़ा तनाव, राष्ट्रपति ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम बदलने का दिया प्रस्ताव।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा बयान देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम बदलकर 'ट्रम्प स्ट्रेट' करने का प्रस्ताव रखा है। यह घोषणा उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर 2 सितंबर 2026 को की, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग अब पूरी तरह से संयुक्त राज्य अमेरिका के नियंत्रण में है और आने वाले दिनों में यह क्षेत्र और अधिक गर्म हो सकता है। इस घटनाक्रम से खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है।
समुद्री नाकाबंदी और सैन्य कार्रवाई
इससे पहले 18 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस जलडमरूमध्य को एक नया अमेरिकी क्षेत्र घोषित किया था और वहां नौसेना की नाकाबंदी लागू कर दी थी। इस सैन्य टकराव के दौरान 1 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए। यह कार्रवाई कथित तौर पर समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए मिसाइल हमले के जवाब में की गई थी। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने 2 सितंबर 2026 को जानकारी दी कि जलमार्ग में अमेरिकी नियंत्रण वाले दो तेल टैंकर बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गए। इसके अलावा सऊदी अरब की राष्ट्रीय शिपिंग कंपनी बहरी ने पुष्टि की कि उसके जहाज SIDR पर हुई एक सुरक्षा घटना में दो फिलिपीनो नाविकों की मौत हो गई। अमेरिकी सेना ने नागरिकों को निशाना बनाने से इनकार किया है, जबकि ईरानी अधिकारियों ने एक शादी समारोह पर हुए अमेरिकी हमले में आम नागरिकों के हताहत होने की बात कही है। तनाव के बीच ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी परिसंपत्तियों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए, जिन्हें समय रहते रोक लिया गया।
अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र के अंतर्गत आता है, और 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन के तहत वहां से गुजरने का अधिकार सभी को सुरक्षित है। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक किसी भी देश के पास एकतरफा रूप से किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर संप्रभुता का दावा करने या उसका नाम बदलने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान के बैंकिंग और एयरलाइन लीजिंग सेक्टर पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इस पूरे संकट को देखते हुए पाकिस्तान, मिस्र और कतर जैसे क्षेत्रीय देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को बचाने के लिए बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील की है। खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय और अन्य प्रवासी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि यह संघर्ष और अधिक बढ़ा, तो उनकी नौकरियों, सुरक्षा और यात्रा पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।