अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव, डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दिया कड़ा बयान.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में एक बार फिर से साफ कर दिया है कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने और हालिया युद्ध को खत्म करने के लिए बना 60-day बातचीत का समय बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया है। बातचीत फेल होने के बाद Donald Trump ने ईरान के नेताओं के खिलाफ तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और समझौते को पूरी तरह खत्म घोषित कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच इस बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया के साथ-साथ खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और कामगारों पर भी पड़ सकता है।
आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा करने की तैयारी
अमेरिका लगातार ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने में लगा हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने 31 अगस्त 2026 को यह ऐलान किया कि अमेरिका इस हफ्ते ईरान के एक और बैंक पर कड़े प्रतिबंध लगाने जा रहा है। सरकार का मुख्य मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था के हर रास्ते को बंद करना है ताकि तेहरान को पूरी तरह अकेला किया जा सके। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से भी इन संस्थानों को बाहर करने की योजना है। इससे पहले अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright ने 26 अगस्त 2026 को कहा था कि अमेरिका बातचीत के रास्ते पर चलना चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह ईरान के परमाणु ठिकानों को पूरी तरह तबाह करने के लिए भी तैयार है। इस संबंध में अधिक जानकारी आप White House Releases पर देख सकते हैं।
फारस की खाड़ी में सैन्य झड़पें और मिसाइल हमला
दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव उस समय खतरनाक स्तर पर पहुंच गया जब 30 अगस्त 2026 को अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में लराक द्वीप पर ईरान के दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने यह कार्रवाई तब की जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC को समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने की तैयारी करते हुए देखा गया था। इसके जवाब में IRGC ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। जॉर्डन की सेना ने 31 अगस्त 2026 की सुबह इनमें से आठ मिसाइलों को हवा में ही नाकाम कर दिया और गिरा दिया।
ईरान के भीतर परमाणु ठिकानों और रणनीतिक फैसलों पर हलचल
ईरान के भीतर भी हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान के परमाणु प्रमुख Mohammad Eslami ने 26 अगस्त 2026 को कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA को '12-Day War' के दौरान क्षतिग्रस्त हुए ठिकानों की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने देश की युद्ध की स्थिति का हवाला देते हुए यह बात कही। हालांकि ईरान आधिकारिक तौर पर अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता है, लेकिन सुप्रीम लीडर के सलाहकार Mohammad Mokhber का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखना परमाणु हथियारों के बराबर ही एक मजबूत सुरक्षा कवच है। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian रणनीतिक सहयोग और परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए करीब 25 बिलियन डॉलर की डील पर चर्चा करने के लिए 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin से मुलाकात करेंगे।