US President Donald Trump का बड़ा बयान, नवंबर चुनाव के तुरंत बाद खत्म हो जाएगा ईरान के साथ युद्ध.

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में दुनिया भर का ध्यान खींचते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस साल नवंबर में होने वाले चुनावों के तुरंत बाद ईरान के साथ चल रहा मौजूदा संघर्ष समाप्त हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान इस चुनाव को प्रभावित करने के लिए काफी बेताब है, लेकिन वोटिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह अमेरिकी आर्थिक दबाव को सहन नहीं कर पाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम सीमा पर पहुंच चुका है और लगातार सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं।
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई
9 सितंबर 2026 को ओमान की खाड़ी और ईरान के खार्ग द्वीप के पास अमेरिकी सेना ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट कर दिया। इस कार्रवाई से पहले नाविकों को जहाजों को छोड़ने की चेतावनी दी गई थी। दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया कि उन्होंने इसका कड़ा जवाब देते हुए दो अमेरिकी जहाजों समेत कुल 10 जहाजों पर हमला किया। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि अमेरिकी नौसेना के किसी भी युद्धपोत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और ईरान के सभी प्रयास विफल साबित हुए।
जॉर्डन के अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमला
संघर्ष के इसी क्रम में ईरान ने जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी बेस की तरफ 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। जॉर्डन की सेना ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में बताया कि उन्होंने हवा में ही 18 मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक लिया, जबकि दो मिसाइलें सुनसान इलाकों में जाकर गिरीं। गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी भी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले को पूरी तरह अप्रभावी बताया और पुष्टि की कि वहां तैनात सभी सैन्यकर्मी सुरक्षित हैं। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर किए जाने वाले हर एक हमले के बदले ईरान को अपने और अधिक तेल टैंकरों से हाथ धोना पड़ेगा।
अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और IAEA का फैसला
सैन्य टकराव के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनाव काफी बढ़ गया है। 9 सितंबर 2026 को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसके तहत ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रिपोर्ट करने का फैसला लिया गया। यह कदम अघोषित यूरेनियम संवर्धन स्थलों के संबंध में ईरान द्वारा सहयोग न किए जाने के कारण उठाया गया है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के समर्थन वाला यह प्रस्ताव पिछले 20 वर्षों में इस तरह का पहला मामला है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस प्रस्ताव और उसके जहाजों पर हुए अमेरिकी हमलों को क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया है। वहीं, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि इसराइल का मुख्य उद्देश्य ईरानी regime को हराना है। पिछले छह से सात महीनों से जारी इस संघर्ष को लेकर हाल ही में सामने आए पोल बताते हैं कि केवल एक तिहाई अमेरिकी ही इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं।