ट्यूनीशिया में मानवाधिकार संगठनों पर कसा शिकंजा, ह्यूमन राइट्स वॉच की नई रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा.

Sushma Kumari2 September 20263 min read33 viewsWorld
ट्यूनीशिया में मानवाधिकार संगठनों पर कसा शिकंजा, ह्यूमन राइट्स वॉच की नई रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा.

ह्यूमन राइट्स वॉच यानी HRW ने ट्यूनीशिया की स्थिति पर एक बड़ी और गंभीर रिपोर्ट जारी की है, जिसमें देश में नागरिक समाजों और संगठनों पर लगातार हो रही कार्रवाई का पर्दाफाश किया गया है। यह रिपोर्ट 2 सितंबर 2026 को सामने आई, जो कुल 49 पन्नों की है और इसका शीर्षक 'वी आर लिविंग ऑन बॉरोड टाइम: रिप्रेशन ऑफ सिविल सोसाइटी इन ट्यूनीशिया' रखा गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ट्यूनीशिया की सरकार साल 2024 से ही लगातार स्वतंत्र संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है, जिससे वहां की जनता के अधिकार सीमित होते जा रहे हैं।

कानूनों का गलत इस्तेमाल और गिरफ्तारियां

रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि कैसे सरकार ने अलग-अलग कानूनों का सहारा लेकर विरोध की आवाजों को दबाने का काम किया है। मई से दिसंबर 2024 के बीच शरणार्थी सहायता और नस्लवाद विरोधी संगठनों से जुड़े 14 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद साल 2025 और 2026 में अदालती कार्रवाई के दौरान नागरिक समाज से जुड़े लोगों को कम से कम 14 बार सजा सुनाई जा चुकी है। इसमें सबसे चर्चित मामला 19 मार्च 2026 का है, जब जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता सादिया मोस्बाह को वित्तीय अपराधों के झूठे आरोपों में 8 साल की जेल और भारी जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा सोनिया डहमानी, मुस्तफा जेमाली और अब्देर्राजेक क्रिमि जैसे कई बड़े नाम भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं, और अगस्त 2026 तक कम से कम 2 संगठन बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।

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सरकार द्वारा बनाए गए सख्त नियम

ट्यूनीशियाई सरकार पर आरोप है कि वह डिक्री-लॉ 2011-88, आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने का 2015 का कानून, और साइबर अपराध से जुड़ा 2022 का कानून जैसे हथियारों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही है। साइबर अपराध कानून का मुख्य रूप से इस्तेमाल 'गलत जानकारी फैलाने' के नाम पर लोगों को जेल भेजने के लिए किया जा रहा है। जुलाई से अक्टूबर 2025 और अप्रैल से मई 2026 के बीच कई संगठनों को बिना किसी वैध प्रक्रिया के अचानक निलंबित कर दिया गया। सरकार ने अक्टूबर 2023 और शुरुआती 2022 में दो ऐसे सख्त बिल भी पेश किए थे, जिनका मकसद स्वतंत्र समूहों के कामकाज और मिलने वाले फंड पर पूरी तरह से काबू पाना था।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चेतावनी

HRW के मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के उप निदेशक बासम ख्वाजा ने साफ कहा कि देश के अधिकारी नागरिक अधिकारों का गला घोंटने के लिए हर संभव रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह सब तब हो रहा है जब देश के आम नागरिक पानी और बिजली की भारी कमी से पहले से ही काफी परेशान हैं। देश के राष्ट्रपति कैस सैयद का ऐसा कहना है कि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए ये सारे कदम उठाना बहुत जरूरी है। लेकिन दूसरी तरफ, मानवाधिकार संगठनों ने इस दमनकारी नीति को तुरंत रोकने और जेल में बंद सभी एनजीओ कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा करने की मांग की है। साथ ही यूरोपीय संघ से अपील की गई है कि वह ट्यूनीशिया सरकार पर दबाव बनाए ताकि वहां लोगों को संगठन बनाने की आजादी फिर से मिल सके। इससे पहले मई 2026 में एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में भी एनजीओ के खिलाफ हो रही ऐसी ही कार्यवाहियों पर चिंता जताई गई थी।

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