सऊदी अरब पर मंडराया खतरा, तुर्किए और पाकिस्तान बढ़ा सकते हैं अपनी सैन्य मदद.

Nura Basta12 September 20263 min read13 viewsSaudi
सऊदी अरब पर मंडराया खतरा, तुर्किए और पाकिस्तान बढ़ा सकते हैं अपनी सैन्य मदद.

सऊदी अरब पर बढ़ते हमलों और लगातार तनाव के बीच क्षेत्रीय विश्लेषकों का कहना है कि Turkiye और Pakistan आने वाले दिनों में सऊदी अरब के लिए अपनी एयर और तकनीकी सहायता को बढ़ा सकते हैं। हुती विद्रोहियों की तरफ से लगातार आक्रामक रवैया अपनाया जा रहा है और किंगडम तथा बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर खतरा बना हुआ है। इस संभावित सैन्य कदम के पीछे मक्का संयुक्त रक्षा समझौता है, जिसे सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच साइन किया गया था और बाद में अगस्त 2026 में इसमें तुर्किए को भी शामिल कर लिया गया था। इस समझौते के नियमों के मुताबिक किसी भी सदस्य देश पर हुआ सशस्त्र हमला सभी देशों पर हमला माना जाता है।

हुती विद्रोहियों का बढ़ता आक्रामक रुख और लाल सागर की स्थिति

ईरान समर्थित हुती विद्रोही समूह ने हाल ही में अपने क्षेत्रीय हमलों को काफी तेज कर दिया है। इन विद्रोहियों ने मोखा बंदरगाह शहर और लाल सागर के एक द्वीप पर कब्जा कर लिया है। इन सब गतिविधियों के कारण इस ग्रुप का यमन के पूरे लाल सागर तट पर नियंत्रण हो गया है, जिससे ग्लोबल शिपिंग लेन पर खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। हाल ही में ड्रोन हमलों के बाद, जिन्हें रियाद और बगदाद द्वारा इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया से जोड़ा गया, सऊदी अरब को अपनी मुख्य ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को एहतियात के तौर पर बंद करना पड़ा था।

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वर्तमान सैन्य सहायता और आधिकारिक बयान

मौजूदा समय में पाकिस्तान सऊदी अरब को बड़ी मात्रा में सैन्य सहायता दे रहा है, जिसमें हजारों सैनिक और लगभग 16 JF-17 Thunder मल्टीरोल विमानों वाला एक एयर स्क्वाड्रन शामिल है। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता Sajjad Haider Khan ने इस बात की पुष्टि की है कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौता पूरी तरह से लागू है और इस्लामाबाद अपनी सभी जिम्मेदारियों को पूरा करने का पूरा इरादा रखता है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अभी किसी भी तरह की सीधी सैन्य प्रतिक्रिया पर चर्चा नहीं चल रही है। पाकिस्तान इसके बजाय सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए एक कूटनीतिक माध्यम के रूप में अपनी भूमिका को पहली प्राथमिकता दे रहा है। इसी तरह, तुर्किए के विदेश मंत्रालय ने भी हुती हमलों की कड़ी निंदा की है और सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और आगे की तैयारी

यह पूरा मामला अभी भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को यमन में संयुक्त राष्ट्र के दूत द्वारा चेतावनी दी गई है कि हुती विद्रोही लाल सागर में एक नई स्थिति स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अमेरिका ने हुती के खिलाफ सीधे सैन्य दखल देने से इनकार कर दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिए हैं कि वाशिंगटन सरकार सऊदी सरकार को खुफिया सहायता प्रदान करेगा। जब क्षेत्रीय देश ओमान में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिरता पर चर्चा करने के लिए बैठक की तैयारी कर रहे हैं, तब मक्का संयुक्त रक्षा समझौता इस चल रहे सैन्य तनाव के बीच अपनी पहली बड़ी परीक्षा का सामना कर रहा है।

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