UAE का कड़ा संदेश, ऊर्जा निर्यात को नहीं बनाएंगे ईरान के हाथों बंधक, होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्पष्ट बात.

संयुक्त अरब अमीरात ने क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को लेकर एक बड़ा और कड़ा बयान जारी किया है। 7 सितंबर 2026 को UAE के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार Anwar Mohammed Gargash ने साफ शब्दों में कहा कि देश अपने ऊर्जा निर्यात को किसी भी कीमत पर बंधक नहीं बनने देगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी एक देश को होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह जलमार्ग एक अंतरराष्ट्रीय रास्ता है और यहां से गुजरने वाले जहाजों को लगातार धमकियों का सामना नहीं करना चाहिए।
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान के साथ महीनों के टकराव और कमर्शियल जहाजों के आवागमन में बाधा के बाद आपसी भरोसे को फिर से बहाल करने में दशकों का समय लग सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए संघर्ष के बाद से पूरे खाड़ी क्षेत्र में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। ईरानी अधिकारियों ने 7 सितंबर 2026 को होर्मुज में एक नए प्रतिबंधित क्षेत्र और शिपिंग कॉरिडोर की योजना का ऐलान किया था। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने चेतावनी दी कि इस जोन में प्रवेश करने वाले जहाजों को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, ईरान के शीर्ष वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिका के किसी भी हमले का कड़ा जवाब देने की बात कही है।
UAE सरकार का क्षेत्रीय आक्रामकता के खिलाफ सख्त रुख
UAE सरकार ने हमेशा से क्षेत्रीय आक्रामकता के खिलाफ एक मजबूत और स्पष्ट नीति अपनाई है। 2 सितंबर 2026 को UAE Ministry of Foreign Affairs ने एक आधिकारिक बयान जारी किया था। इस बयान में बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र को निशाना बनाने वाले ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की गई थी। सरकार ने इन सभी कार्रवाइयों को संप्रभुता का खुला उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया था। इस आधिकारिक जानकारी के बारे में अधिक विवरण UAE Ministry of Foreign Affairs की आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है।
इससे पहले अगस्त 2026 में दिए गए बयानों में भी Anwar Mohammed Gargash ने ईरानी आक्रामकता को एक गलत रणनीतिक कदम बताया था। उन्होंने कहा था कि इस तरह की हरकतों से देश का अलगाव और अधिक गहरा हुआ है। उन्होंने क्षेत्र में चल रहे 'ना युद्ध, ना शांति' के वर्तमान माहौल को खत्म करने की पुरजोर मांग की थी। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत से आवाजाही करने वाले लोगों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों और ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ता है।