UAE में ईरान संकट का असर, अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध, गल्फ देशों के लिए बढ़ गई मुश्किलें.

Sushma Kumari30 August 20262 min read33 viewsUAE
UAE में ईरान संकट का असर, अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध, गल्फ देशों के लिए बढ़ गई मुश्किलें.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब गल्फ देशों के एनर्जी मार्केट और वहां काम करने वाले लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों के छह महीने बीत चुके हैं और यह संघर्ष अब एक ऐसे दौर में पहुंच गया है जो साल 2027 तक खिंच सकता है। इस पूरी स्थिति के कारण पूरी दुनिया में महंगाई लगातार बढ़ रही है और आम आदमी का बजट बिगड़ रहा है।

हार्मोन जलडमरूमध्य और तेल यातायात पर संकट

इस संघर्ष की वजह से Strait of Hormuz से होने वाला तेल का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस रास्ते से गुजरने वाला जहाजों का ट्रैफिक सामान्य से काफी कम हो गया है। हालांकि अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright ने दावा किया था कि इस रास्ते से रोजाना 8 million barrels से ज्यादा तेल निकल रहा है, लेकिन स्वतंत्र शिपिंग कंपनियों ने इस बात से इनकार किया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी की वजह से 82 commercial vessels को अपना रास्ता बदलना पड़ा है।

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यूएई में बैंक पर वित्तीय कार्रवाई

ईरान पर वित्तीय दबाव बनाते हुए 30 अगस्त 2026 को अमेरिकी वित्त विभाग की एजेंसी FinCEN ने 'Operation Economic Outcast' की शुरुआत की। इसके तहत यूएई में स्थित Banque Misr की शाखाओं को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से अलग करने का प्रस्ताव रखा गया है। आरोप है कि इस बैंक ने जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच ईरानी नेटवर्क से जुड़े 103 companies के लिए लगभग $1.8 billion का लेन-देन किया था। इस वजह से ईरान का तेल निर्यात युद्ध से पहले के मुकाबले करीब 85% तक गिर चुका है।

सुरक्षा और रिफाइनिंग की समस्याएं

इसराइल के ऊर्जा मंत्री Eli Cohen ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान अपने परमाणु या मिसाइल कार्यक्रमों को दोबारा शुरू करने की कोशिश करता है, तो इसराइल उस पर और हमले करेगा। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों की वजह से ईरान का परमाणु कार्यक्रम two to four years पीछे चला गया है। इसके अलावा मिडिल ईस्ट की करीब 20% refining capacity युद्ध के नुकसान या निर्यात में रुकावट के कारण बंद पड़ी है। इन सभी हालातों को देखते हुए गल्फ देशों ने अब पाइपलाइन और पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया है ताकि स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पर निर्भरता को कम किया जा सके।

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