UK का ईरान पर बड़ा एक्शन, परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए कड़े प्रतिबंध लागू

यूनाइटेड किंगडम यानी UK की सरकार ने ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों का दायरा बढ़ा दिया है। इस संबंध में 8 सितंबर 2026 को आधिकारिक तौर पर नया कानून प्रकाशित किया गया है, जिसके तहत ईरान पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव को और अधिक तेज कर दिया गया है। फॉरेन ऑफिस मिनिस्टर Stephen Doughty ने संसद में एक लिखित बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी और बताया कि इन नए नियमों का मकसद ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकना और उसकी आक्रामक क्षमताओं को कमजोर करना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, साल 2015 के समझौते यानी JCPOA के तहत पहले जो प्रतिबंध हटाए गए थे, उन्हें अब दोबारा लागू कर दिया गया है।
UK की वित्तीय व्यवस्था और व्यापार पर कड़े प्रतिबंध
इस नए प्रतिबंध ढांचे के लागू होने के बाद ईरान की पहुंच UK की वित्तीय प्रणाली तक बेहद सीमित हो जाएगी। इसके अलावा व्यापारिक प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाते हुए इसमें ऊर्जा क्षेत्र, सॉफ्टवेयर और गोल्ड सेक्टर को भी शामिल कर लिया गया है। इतना ही नहीं, इसके दायरे में कई तरह की प्रतिबंधित तकनीक, सामान और सेवाएं भी लाई गई हैं। इस कानून के तहत UK को ईरानी जहाजों पर कानूनी रूप से कार्रवाई करने का और अधिकार मिल गया है। साथ ही कुछ खास छूट को छोड़कर ईरानी विमानों के UK की सीमा में लैंड करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.
ईरान के पास है 400 किलो से ज्यादा यूरेनियम
मंत्री Stephen Doughty ने चिंता जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगातार चिंतित है। उन्होंने बताया कि ईरान के पास इस समय 400 किलोग्राम से अधिक यूरेनियम मौजूद है, जिसे 60% तक एनरिच यानी समृद्ध किया गया है। वर्तमान में ईरान इकलौता ऐसा देश है जो बिना परमाणु हथियार वाला देश होते हुए भी यूरेनियम को इस स्तर तक एनरिच कर रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी हालत में परमाणु हथियार हासिल न कर सके। हालांकि, अर्थव्यवस्था पर इसका असर कम से कम पड़े, इसके लिए पैकेज में कुछ खास छूट भी दी गई है, जिसमें अजरबैजान के शाह डेलिज गैस फील्ड के लिए लाइसेंस छूट शामिल है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा है कूटनीतिक दबाव
यह बड़ा फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और E3 देशों यानी फ्रांस, जर्मनी और UK ने मिलकर एक संयुक्त कूटनीतिक कदम उठाया है। ये देश IAEA यानी इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के गवर्नर बोर्ड में एक ऐसा प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहे हैं जिसके जरिए ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UN Security Council में रिपोर्ट किया जा सके। पिछले दो दशकों में ऐसा कदम नहीं उठाया गया था। यह फैसला IAEA के डायरेक्टर जनरल Rafael Grossi की उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें उन्होंने 7 सितंबर 2026 को बताया था कि तेहरान ने राजनीतिक बातचीत में प्रगति होने तक एजेंसी के साथ सहयोग करने से मना कर दिया है। ईरान ने पहले की चेतावनी दी है कि यदि IAEA का यह प्रस्ताव पास होता है, तो वह इसका जवाब अपने तरीके से देगा। हालांकि, 8 सितंबर तक लंदन स्थित ईरानी दूतावास की तरफ से इन नए प्रतिबंधों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.