Strait of Hormuz में बढ़ा तनाव, ब्रिटेन और फ्रांस ने की शांति की अपील तो ईरान और अमेरिका आमने-सामने

फारस की खाड़ी यानी स्ट्रेट ऑफ होरमुज में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। समुद्री रास्तों पर जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच 3 सितंबर 2026 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Andy Burnham और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने लंदन के डाउनिंग स्ट्रीट में एक अहम मुलाकात की। इस बैठक में दोनों बड़े नेताओं ने इस बेहद संवेदनशील जलडमरूमध्य में तनाव को तुरंत कम करने की पुरजोर अपील की है। नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा और नेविगेशन की आजादी को बहाल करने के लिए एक एंग्लो-फ्रेंच नौसैनिक मिशन पर विचार किया जा रहा है, बशर्ते हालात इसकी इजाजत दें। इस मुलाकात की आधिकारिक जानकारी gov.uk पर साझा की गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष
इस इलाके में पिछले कुछ दिनों से मिलिट्री टेंशन बहुत ज्यादा बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच 1 सितंबर और 2 सितंबर 2026 को भारी सैन्य टकराव देखने को मिला। अमेरिकी सेना ने ईरान के करीब 60 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए। इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम और खदान बिछाने वाले यानी mine-laying एसेट्स को तबाह कर दिया गया। अमेरिकी सेना इस दौरान तेल से भरे 40 कमर्शियल जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही थी, जिन पर 18 मिलियन बैरल तेल लदा हुआ था। अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright के पहले के बयानों के उलट, अधिकारियों ने साफ किया कि अमेरिकी बल अभी सीधे तौर पर वाटरवे में जहाजों को एस्कॉर्ट नहीं कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 1 सितंबर को बताया था कि ईरान ने हाल ही में अमेरिकी हमलों में नष्ट हुए रडार सिस्टम को दोबारा बनाने की कोशिश की थी।
ईरान की सख्ती और खाड़ी देशों पर असर
दूसरी तरफ, ईरान की तरफ से भी लगातार दबाव बनाया जा रहा है। फारस खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (PGSA) ने नियमों का पालन न करने के आरोप में 11 और जहाजों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इसके साथ ही प्रतिबंधित जहाजों की कुल संख्या अब 56 हो गई है। 2 सितंबर को ईरान ने दावा किया कि उसने दक्षिणी समुद्री मार्गों में नौसैनिक खदानें बिछाई हैं, जिसके कारण दो तेल टैंकरों में भयंकर आग लग गई। इसके अलावा, सऊदी अरब ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय शिपिंग कंपनी के एक तेल टैंकर पर हुए ईरानी हमले में दो फिलिपिनो नाविकों की मौत हो गई। ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने एक बयान जारी कर इस रास्ते पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के इरादे को दोहराया है।
ड्रोन हमलों से बढ़ी खाड़ी देशों की मुश्किलें
क्षेत्रीय तनाव के बीच कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में अमेरिकी बलों पर ईरानी ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आई हैं। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर का मानना है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान की निगरानी और खदान बिछाने की ताकत में काफी कमी आई है। वहीं, पावर एंड कॉरिडोर्स के विश्लेषकों का कहना है कि ईरान इसके बावजूद अपनी समुद्री व्यवस्था को सख्ती से लागू करने में कामयाब हो रहा है। तमाम पाबंदियों और हमलों के बावजूद 31 अगस्त 2026 को इस रास्ते से 17 मिलियन बैरल से अधिक तेल का परिवहन किया गया, जो इस चल रहे संघर्ष की शुरुआत के बाद से एक दिन में दर्ज किया गया सबसे बड़ा आंकड़ा है। Gulf देशों में रहने वाले प्रवासियों और कामगारों के लिए इस क्षेत्र की हर हलचल बहुत मायने रखती है क्योंकि इससे वहां की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों सीधे तौर पर प्रभावित होती हैं।