UK Sanctions Israel: ब्रिटेन के नए प्रतिबंधों पर इसराइल भड़का, गिदोन सार बोले यह संप्रभुता पर हमला है।

ब्रिटेन की सरकार ने इसराइल के खिलाफ एक बड़ा और कड़ा प्रतिबंधों का पैकेज जारी किया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। 8 सितंबर 2026 को इसराइल के विदेश मंत्री Gideon Saar ने ब्रिटेन के इस कदम की कड़ी निंदा की और इसे इसराइल की संप्रभुता में सीधा दखल करार दिया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री Andy Burnham के नेतृत्व वाली सरकार ने आधिकारिक तौर पर वेस्ट बैंक में इसराइल के कब्जे को गैरकानूनी घोषित कर दिया है और इसके पीछे विस्तारवादी एजेंडे तथा अवैध बस्तियों के बसाव का हवाला दिया है।
ब्रिटेन द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंध और नियम
ब्रिटेन के विदेश सचिव Ed Miliband ने साफ शब्दों में कहा कि इन उपायों का मुख्य उद्देश्य टू-स्टेट सॉल्यूशन यानी दो-राज्य समाधान को खत्म होने से बचाना है। उन्होंने बस्तियों में रहने वाले लोगों पर फिलिस्तीनियों के जातीय सफाए का गंभीर आरोप भी लगाया है। ब्रिटेन के इस व्यापक प्रतिबंध पैकेज में बस्तियों में बनने वाले सामानों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध, इसराइल को सभी हथियारों के लाइसेंस पर रोक, बस्तियों का समर्थन करने वाली सेवाओं पर रोक, ब्रिटेन में बस्ती की संपत्तियों के विज्ञापनों पर पाबंदी और हिंसक गतिविधियों से जुड़े लोगों पर व्यक्तिगत प्रतिबंध शामिल हैं। आयात पर यह प्रतिबंध आगामी 6 से 9 महीनों के भीतर लागू होने की उम्मीद जताई गई है। ब्रिटेन की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के जुलाई 2024 के उस परामर्श के अनुरूप है जिसमें कब्जे को अवैध बताया गया था।
इसराइली मंत्रियों की तीखी प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय बयान
इसराइली अधिकारियों ने इस फैसले पर बहुत तीखा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री Gideon Saar ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ब्रिटेन इसराइल के खिलाफ कदम उठाएगा, तो इसराइल भी ब्रिटेन के खिलाफ कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ब्रिटेन की लेबर पार्टी की सरकार घरेलू राजनीतिक फायदों के लिए ऐसा कर रही है। इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir ने सुझाव दिया कि इसराइल को ब्रिटेन पर प्रतिबंध लगाना चाहिए और फॉकलैंड द्वीप समूह पर अर्जेंटीना की संप्रभुता को मान्यता देनी चाहिए। वित्त मंत्री Bezalel Smotrich ने ब्रिटिश राजदूत को देश से बाहर निकालने की मांग की और ब्रिटेन पर यहूदी विरोधी होने का आरोप लगाया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटेन की इस नीति को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसराइल में अमेरिकी राजदूत Mike Huckabee ने इस फैसले को यहूदी लोगों के साथ भेदभाव बताया और अमेरिका की तरफ से इसके परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। हालांकि, फ्रांस और कनाडा जैसे देशों ने भी ब्रिटेन के साथ मिलकर बस्तियों के सामानों के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन और स्वीडन ने भी इसका समर्थन किया है। ब्रिटेन के यहूदी लीडरशिप काउंसिल ने इन प्रतिबंधों को एक दंडात्मक और असंतुलित तरीका बताया है, जिससे ब्रिटेन में यहूदियों का जीवन खतरे में पड़ सकता है।