UN की चेतावनी, गाजा में सबूत मिटाने की चल रही है साजिश, इसराइल पर लगे गंभीर आरोप.

संयुक्त राष्ट्र की विशेष rapporteur Francesca Albanese ने गत 8 सितंबर 2026 को एक बहुत बड़ी और गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने बताया कि गाजा पट्टी में इमारतों के मलबे को हटाने, कुचलने और दूसरी जगह भेजने का काम तेजी से किया जा रहा है, जो कि इसराइली सैन्य नियंत्रण वाले इलाकों में हो रहा है। इस कार्रवाई की वजह से अंतरराष्ट्रीय अपराधों के भौतिक सबूत हमेशा के लिए खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है और मलबे से इंसानी अवशेषों को बाहर निकालने का काम भी बहुत मुश्किल हो गया है। इस पूरी स्थिति को लेकर आम लोगों और दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों में चिंता का माहौल है।
गाजा के मलबे में दबे हैं हजारों लोगों के अवशेष
विशेषज्ञों और रिपोर्ट के मुताबिक यह अनुमान लगाया गया है कि मलबे के नीचे 10,000 से ज्यादा लोग दबे हुए हैं। अगस्त महीने में बड़े पैमाने पर मलबा हटाने की जो खबरें सामने आई थीं, उसके बाद संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी ने चेतावनी दी है कि जो कंपनियां और अधिकारी इस तरह के कामों में शामिल हैं, उन्हें भविष्य में आपराधिक जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है। इन जगहों को नरसंहार से जुड़ी जांच के लिए बहुत ही जरूरी क्राइम सीन और कब्रिस्तान के रूप में देखा जा रहा है, जिन्हें इस तरह से साफ करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ माना जा रहा है।
यूके के व्यापार प्रतिबंध और नीतिगत बदलाव
इस बीच यूनाइटेड किंगडम द्वारा अवैध इसराइली बस्तियों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर भी चर्चा की गई। Francesca Albanese ने इस कदम को सरकार की नीति में एक बहुत जरूरी बदलाव और एक बड़ा शुरुआती कदम बताया है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इस नीति को असरदार बनाने के लिए इसे एक बड़े बदलाव का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने सलाह दी कि इस प्रतिबंध के दायरे को सेवाओं तक बढ़ाया जाना चाहिए और इसराइल के साथ हथियारों के लाइसेंसिंग और खुफिया सहयोग को धीरे-धीरे निलंबित करने की मांग की।
अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के नियमों और यूरोपीय देशों की भूमिका
अधिकारी ने यह भी बात रखी कि यूके को इस नए व्यापार प्रतिबंध की वजह से इसराइल और अमेरिका दोनों की तरफ से भारी दबाव का सामना करना पड़ सकता है। संघर्ष के कानूनी ढांचे के बारे में बात करते हुए उन्होंने साल 2024 की अंतरराष्ट्रीय न्यायालय यानी ICJ की उस सलाह का जिक्र किया जिसमें इसराइल की मौजूदगी को पूरी तरह से गैरकानूनी बताया गया था। इस राय के तहत तीसरे देशों को किसी भी तरह की मदद या सहायता देने से मना किया गया है जो इस गैरकानूनी मौजूदगी को बनाए रखती है। उन्होंने पहले भी कहा था कि यूरोप को इसराइल की इस व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म करने के लिए काम करना चाहिए।