संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में खुलासा, इस्राइली सैन्य अभियानों के कारण हजारों लोग हुए विस्थापित.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार रिपोर्ट के अनुसार, 4 सितंबर 2026 को यह पुष्टि की गई कि इस्राइली सैन्य अभियानों के कारण कब्जे वाले वेस्ट बैंक के तीन शरणार्थी शिविरों से फिलिस्तीनी आबादी को जबरन हटा दिया गया। यह पूरी कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती है और विस्थापित लोगों को अभी तक उनके घरों में वापस लौटने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस गंभीर मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चिंता पैदा कर दी है और मानवाधिकार संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
ऑपरेशन आयरन वॉल और विस्थापन का दायरा
शुरुआती विस्थापन 21 जनवरी 2025 को शुरू हुए 'ऑपरेशन आयरन वॉल' नामक सैन्य अभियान के दौरान हुआ था, जिससे जेनिन, तुलकरम और नूर शम्स शरणार्थी शिविर बुरी तरह प्रभावित हुए। ह्यूमन राइट्स वॉच ने 20 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इस अवधि के दौरान 32,000 लोगों को जबरन निकाला गया था, जो युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आता है। ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि लगातार जारी सैन्य हमलों के कारण अब 40,000 से अधिक फिलिस्तीनी बेघर हो चुके हैं। जेनिन में सैन्य अभियान 592 दिन, तुलकरम में 586 दिन और नूर शम्स में 560 दिन से अधिक समय तक चला है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और आधिकारिक बयान
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रवक्ता थमीन अल-खेतन ने 17 मार्च 2026 को अपने बयान में इन घटनाओं को कब्जे वाले क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जबरन स्थानांतरण की एक सुनियोजित इस्राइली नीति का हिस्सा बताया। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने फरवरी 2025 में ही चेतावनी दी थी कि इस तरह का विस्थापन जिनेवा सम्मेलनों के तहत अवैध है। नियमों के मुताबिक विस्थापित नागरिकों की रक्षा करना और शत्रुता समाप्त होने पर उन्हें वापस लौटने की अनुमति देना अनिवार्य है, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत बनी हुई है।
मौजूदा हालात और अन्य बस्तियों पर असर
जमीनी हालात अभी भी काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। 4 सितंबर 2026 को नाबुलस के पूर्व में स्थित पुरानी और नई अस्कर शरणार्थी शिविरों में नए सिरे से सैन्य घुसपैठ की खबर आई, जहां घरों की तलाशी ली गई और कई फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया। इसके अलावा, अल-बैदार बेडौन अधिकार समूह के हसन मालीहत ने बताया कि हाल ही में बस्तियों के विस्तार के लिए जमीन खाली कराने के प्रयासों के तहत जेरिको के उत्तर में काबनेह बेडौन कबीले के लगभग 20 परिवारों को बंजर बस्तियों और हमलों के कारण अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।