UNHCR का बड़ा बयान, रोहिंग्या बच्चों की शिक्षा म्यांमार वापसी के लिए बेहद जरूरी.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्च आयोग यानी UNHCR के बांग्लादेश प्रतिनिधि ने 7 सितंबर 2026 को यह साफ कर दिया है कि विस्थापन का जीवन जी रहे रोहिंग्या बच्चों के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है। इस शिक्षा से बच्चों के अंदर उम्मीद और हौसला पैदा होता है ताकि वे भविष्य में अपने देश म्यांमार वापस लौटने के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। दुनिया भर के बड़े संगठन इस बात पर लगातार जोर दे रहे हैं कि शरणार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए पढ़ाई का साधन होना अनिवार्य है, भले ही इस समय मानवीय सहायता के काम में बहुत सारी बड़ी रुकावटें आ रही हों।
बजट की कमी से बंद हुए हजारों लर्निंग सेंटर
पढ़ाई की इतनी अहमियत होने के बावजूद इस समय राहत कार्यों को चलाने में पैसों की बहुत बड़ी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। 7 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार, बजट की भारी कमी के कारण 6,400 से ज्यादा लर्निंग सेंटर्स को पूरी तरह बंद करना पड़ गया है। इस वजह से लगभग 300,000 रोहिंग्या बच्चों की पढ़ाई लिखाई बिल्कुल रुक गई है और वे शिक्षा से वंचित हो चुके हैं। राहत सेवाओं में आई यह गिरावट इस वजह से भी आई है क्योंकि पिछले साल के मुकाबले इस साल मानवीय सहायता के लिए मिलने वाले फंड में 26 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है।
बांग्लादेश सरकार और अंतरराष्ट्रीय प्रयास
बच्चों की पढ़ाई और राहत कार्यों को संभालने के लिए कूटनीतिक स्तर पर लगातार कोशिशें जारी हैं। इसी कड़ी में 4 फरवरी 2026 को बांग्लादेश सरकार ने विश्व बैंक के जरिए मिलने वाले अनुदान से 16 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि को मंजूरी दी थी, जिसका मुख्य उद्देश्य कैंपों के अंदर ही प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देना था। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा और पहला कदम था, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने यह कड़ा नियम बना रखा है कि कोई भी रोहिंग्या बच्चा कैंप के बाहर बने आम सरकारी स्कूलों में दाखिला नहीं ले पाएगा। सरकार का ऐसा सोचना है कि इन शरणार्थियों की मौजूदगी यहाँ सिर्फ और सिर्फ थोड़े समय के लिए है इसलिए उन्हें देश की मुख्यधारा में शामिल नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र में बांग्लादेश के स्थायी प्रतिनिधि H.E. Salahuddin Noman Chowdhury ने भी कई बार इस बात पर जोर दिया है कि म्यांमार में सुरक्षित वापसी ही इस समस्या का एकमात्र स्थायी हल है, जिसकी पूरी जानकारी आप आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर और वैश्विक समर्थन
UNHCR के इस बयान के ठीक उसी दिन ऑस्ट्रेलिया के उच्च कमिश्नर Jeremy Bruer ने बांग्लादेश की यात्रा के दौरान मानवीय सहायता के प्रति अपने देश का पूरा समर्थन जताया और रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी से जुड़ी बांग्लादेश की नीति का आधिकारिक रूप से समर्थन किया। इन तमाम अच्छी और बुरी खबरों के बीच शरणार्थियों की सेहत से जुड़े आंकड़े बहुत डराने वाले हैं। डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर यानी MSF की रिपोर्ट के मुताबिक 25 अगस्त 2026 तक कैंपों में रह रहे बच्चों की मानसिक हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। लगातार बनी हुई अनिश्चितता और तनाव के कारण बच्चे मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं और यहाँ तक कि आत्महत्या की कोशिशें भी सामने आ रही हैं। इस पूरी स्थिति के बारे में अधिक जानकारी आप ReliefWeb रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं।