जिनेवा में हुआ हंगामा, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में पाकिस्तान को पडे़ सुनने

जिनेवा के पहले पैलेस ऑफ नेशंस में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान एक तीखी बहस देखने को मिली। आम बहस के समय जब मानवाधिकार कार्यकर्ता आриф आजकिया अपनी बात रख रहे थे, तब पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने बीच में रोकते हुए आपत्ति जताई और उनके भाषण को तुरंत बंद करने की मांग की। जिनेवा में आयोजित इस वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की तरफ से यह कदम तब उठाया गया जब वहां के गंभीर हालातों पर चर्चा हो रही थी।
पाकिस्तान की आपत्ति और चेयर का फैसला
कार्यकर्ता आ Arif Aajakia के अनुसार, जब वह मंच से अपनी बात कह रहे थे तो पाकिस्तान के मिशन ने तुरंत कड़ा विरोध जताया। पाकिस्तानी डेलीगेट ने आरोप लगाया कि इस बड़े मंच का इस्तेमाल पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है और उन्होंने कार्यकर्ता के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद मीटिंग के चेयर ने स्थिति को संभालते हुए स्पष्ट किया कि इस समय जनरल डिबेट चल रही है और नियम के मुताबिक वक्ता को अपनी बात पूरी करने का पूरा अधिकार है। चेयर ने अनुमति देते हुए आ Arif Aajakia को फिर से माइक सौंप दिया ताकि वे अपना अधूरा बयान जारी रख सकें।
सिंध और बलूच मामलों पर उठाए गए गंभीर सवाल
दोबारा बोलने का मौका मिलने पर कार्यकर्ता ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी ओर से दी गई सारी जानकारी पूरी तरह से दस्तावेजों पर आधारित है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से यह मांग की कि पाकिस्तान में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के मामलों पर उसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। अपनी बात रखते हुए उन्होंने पाकिस्तान के कई इलाकों जैसे सिंध, बलूचस्तान, खैबर पख्तूनख्वा के साथ-साथ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और गिलगित-बल्तिस्तान के हालात का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों में आम नागरिकों को गैर-न्यायिक हत्याओं, जबरन उठा लिए जाने, शारीरिक प्रताड़ना और गायब किए जाने जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, ये सभी दावे कार्यकर्ता द्वारा अपने भाषण में किए गए थे और इन्हें किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा सत्यापित नहीं किया गया था।
राजनीतिक बदलावों और सैन्य नियंत्रण पर आलोचना
इस संबोधन के दौरान राजनीतिक और संवैधानिक सुधारों को लेकर भी तीखा हमला बोला गया। वक्ता ने आरोप लगाया कि हाल ही में किए गए बदलावों की वजह से सत्ता कुछ ही हाथों में सिमट कर रह गई है और क्षेत्रीय संसाधनों पर कड़ा नियंत्रण स्थापित कर लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि देश का सैन्य नेतृत्व सिंध, बलूचस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के राजनीतिक संस्थानों के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों पर भी पूरी तरह से कब्जा करना चाहता है। अपने भाषण के अंत में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से यह अपील की कि इन तमाम कथित उल्लंघनों के लिए देश को जवाबदेह बनाया जाए। आपको बता दें कि यह सत्र जिनेवा में 7 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 17 सितंबर के कार्यक्रम के तहत आइटम 3 के अंतर्गत आम बहस शामिल थी।