पूर्वी यरुशलम में यूएनआरडब्ल्यूए सेंटर पर इज़राइली कब्जे की निंदा, ईयू समेत 14 देशों ने जताया कड़ा विरोध.

Nura Basta29 August 20263 min read24 viewsWorld
पूर्वी यरुशलम में यूएनआरडब्ल्यूए सेंटर पर इज़राइली कब्जे की निंदा, ईयू समेत 14 देशों ने जताया कड़ा विरोध.

पूर्वी यरुशलम में संयुक्त राष्ट्र की फिलिस्तीनी शरणार्थी एजेंसी UNRWA की एक सुविधा पर इज़राइली सेना द्वारा कब्जा किए जाने का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ चुका है। यूरोपीय संघ यानी EU और विश्व के 14 देशों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और इज़राइल से एजेंसी के कामकाज में किसी भी तरह की रुकावट को तत्काल रोकने की मांग की है। तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू के मुताबिक, यरुशलम स्थित बेल्जियम के महावाणिज्य दूतावास की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया गया था जिसमें इस पूरी कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई गई है।

किन देशों ने जताया विरोध और क्या है मामला

जारी किए गए संयुक्त बयान में बेल्जियम, ब्राज़ील, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, जापान, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्पेन, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ शामिल हैं। इन सभी देशों ने इज़राइली सेना द्वारा हाल ही में कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर में कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से प्रवेश करने और पूर्वी यरुशलम में UNRWA की अन्य सुविधाओं पर कब्जा जमाने की पुरजोर आलोचना की है। UNRWA सलाहकार आयोग के इन सदस्य देशों ने साफ शब्दों में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के परिसरों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी सुरक्षा मिलती है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विशेषाधिकार और प्रतिरक्षा से संबंधित कन्वेंशन का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि इन परिसरों की स्थिति का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।

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कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर का इतिहास और महत्व

रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को इज़राइली सैनिकों ने UNRWA के कर्मचारियों को जबर्दस्ती कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर से बाहर खदेड़ दिया और पूरे परिसर पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। इसके बाद सेंटर के मुख्य आंगन में इज़राइली झंडा भी फहराया गया। इस दौरान इज़राइली सेना के जवान कलंदिया शरणार्थी शिविर और उसके पास के काफ़्र अक़ाब इलाके में भी भारी संख्या में तैनात रहे। इस पूरी कार्रवाई के दौरान वहां लगातार तलाशी अभियान चलाए गए और स्थानीय फिलिस्तीनियों से पूछताछ की गई। कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर केवल एक इमारत नहीं है बल्कि यह साल 1952 में फिलिस्तीन में UNRWA के शुरुआती केंद्रों में से एक के तौर पर स्थापित किया गया था। इस केंद्र में शिक्षा, व्यावसायिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा ट्रेनिंग वर्कशॉप, क्लासरूम, डॉरमेट्री और प्रशासनिक इमारतें मौजूद हैं। यहां हर साल करीब 270 छात्र 16 व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण लेते हैं और लगभग 250 से 300 छात्र हर साल इस केंद्र से अपना कोर्स पूरा करके निकलते हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएनआरडब्ल्यूए का जनादेश

संयुक्त बयान में इज़राइल से यह साफ तौर पर कहा गया है कि वह संयुक्त राष्ट्र के निर्देशों का तुरंत और पूरी तरह से पालन करे। इन देशों ने मांग की कि UNRWA को बिना किसी बाधा के अपना निर्धारित मानवीय और अन्य जरूरी काम करने की पूरी अनुमति दी जानी चाहिए। बयानों में यह भी कहा गया कि इज़राइल को अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का सम्मान करना चाहिए और एजेंसी की गतिविधियों एवं कामकाज में सभी तरह की रुकावटों को बिना किसी देरी के बंद करना चाहिए। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब यूएनआरडब्ल्यूए को लेकर इज़राइल और संयुक्त राष्ट्र के बीच तनाव लगातार चरम पर है। इज़राइली संसद ने साल 2024 में एक कानून को मंजूरी दी थी जिसके तहत इज़राइल के भीतर UNRWA की गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने और एजेंसी के कामकाज को सीमित करने का प्रावधान किया गया था। इसके बाद यह कानून पिछले साल लागू भी कर दिया गया था। इसके विपरीत, अक्टूबर 2025 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस यानी ICJ ने भी इस बात को दोहराया था कि इज़राइल को संयुक्त राष्ट्र की सुविधाओं की सुरक्षा और पवित्रता का पूरा सम्मान करना चाहिए और एजेंसी के कामकाज में बिल्कुल हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इज़राइल के भारी विरोध को दरकिनार करते हुए UNRWA के मैंडेट को तीन साल के लिए और बढ़ा दिया था जिससे एजेंसी को जून 2029 तक अपना कामकाज जारी रखने की अनुमति मिल गई है।

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