पूर्वी यरुशलम में UNRWA फैसिलिटी पर इस्राइली कब्जे के बाद मचा बवाल, दुनिया भर के देशों ने की कड़ी निंदा.

Sushma Kumari27 August 20262 min read50 viewsWorld
पूर्वी यरुशलम में UNRWA फैसिलिटी पर इस्राइली कब्जे के बाद मचा बवाल, दुनिया भर के देशों ने की कड़ी निंदा.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस समय गहरी चिंता और आक्रोश फैल गया जब इस्राइली सेना ने 25 अगस्त 2026 को पूर्वी यरुशलम के कब्जे वाले इलाके में स्थित UNRWA Qalandiya Vocational Training Center पर जबरन कब्जा कर लिया। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व इस्राइल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर Itamar Ben-Gvir ने किया और साफ तौर पर ऐलान किया कि यरुशलम में इस एजेंसी के लिए कोई जगह नहीं है। इस घटना के बाद से पूरी दुनिया में इस्राइल के इस कदम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

यूनाइटेड नेशंस और अंतरराष्ट्रीय नेताओं का कड़ा रुख

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने इस घुसपैठ की कड़ी निंदा की और बताया कि मई 2026 के बाद से इस तरह की यह पांचवीं अवैध घटना है। उन्होंने साफ शब्दों में मांग की कि इस इमारत को तुरंत संयुक्त राष्ट्र को वापस सौंपा जाना चाहिए। वेस्ट बैंक के लिए UNRWA के डायरेक्टर ऑफ अफेयर्स Roland Friedrich ने इस जब्ती को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यूएन चार्टर और उसकी विशेष छूट का गंभीर उल्लंघन बताया है। इसके अलावा, यूएन स्पेशल कोऑर्डिनेटर Ramiz Alakbarov ने भी 26 अगस्त 2026 को सुरक्षा परिषद की ब्रीफिंग के दौरान इन कानूनी नियमों का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को गलत ठहराया।

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यूरोपीय संघ की कमिश्नर Hadja Lahbib ने इस एंट्री को गैरकानूनी और पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है। वहीं यूनाइटेड किंगडम की तरफ से मिनिस्टर Stephen Doughty और राजदूत Sarah MacIntosh ने इस टेकओवर को बेहद अपमानजनक और गलत करार दिया। इस बीच डेनमार्क, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, जर्मनी, आयरलैंड, Italy, जापान, नॉर्वे और स्पेन समेत कुल बारह देशों के एक समूह ने इस छापेमारी की कड़ी आलोचना की। इसके अलावा कतर और मिस्र ने भी क्रमशः 26 अगस्त और 27 अगस्त को अपने आधिकारिक बयान जारी किए। मलेशिया ने भी इस मामले पर आधिकारिक प्रेस बयान जारी कर इस इनकर्सन की कड़ी निंदा की है।

इस्राइल का अंदरूनी कानून और जमीनी हालात

इस पूरी कार्रवाई के दौरान 26 अगस्त 2026 को यरुशलम म्युनिसिपल क्रू ने तुरंत इस जगह पर रिनोवेशन का काम शुरू कर दिया, ताकि इस सेंटर को एक म्युनिसिपल एजुकेशनल कॉम्प्लेक्स में बदला जा सके। इस्राइली अधिकारियों का दावा है कि यह जमीन साल 1937 से यहूदी नेशनल फंड के पास रही है। दूसरी तरफ, 27 अगस्त 2026 को इंटरनेशनल बार एसोसिएशन के ह्यूमन राइट्स इंस्टीट्यूट और अरब नेशनल कांग्रेस ने भी इस घटना की खुलकर आलोचना की।

फिलिस्तीनी प्रेसिडेंसी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तुरंत सख्त और बाध्यकारी कदम उठाने की अपील की है। हालांकि, इस्राइली प्रशासन का कहना है कि उनकी यह कार्रवाई अक्टूबर 2024 में पास हुए घरेलू कानून के पूरी तरह से मुताबिक है, जिसके तहत इस्राइली क्षेत्र में UNRWA के कामकाज पर रोक लगाने की बात कही गई थी। 27 अगस्त 2026 तक इस्राइली सेना के जवान इस जगह पर तैनात रहे ताकि इस फैसिलिटी को बदलने के काम की निगरानी की जा सके।

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