हार्मज जलडमरूमध्य में तनाव तेज, अमेरिकी नौसेना ने रोके 86 कमर्शियल जहाज और ईरान पर बढ़ाया दबाव

फारस की खाड़ी और उसके आसपास के समुद्री इलाकों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिका के सेंट्रल कमांड यानी US CENTCOM ने फारस की खाड़ी के अहम रास्ते Strait of Hormuz में कड़ा एक्शन लेते हुए कुल 86 कमर्शियल जहाजों को रोक दिया है। ईरान की तरफ से बढ़ाई जा रही मुश्किलों और नेवल नाकेबंदी को मजबूत करने के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है। इस बीच, खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि इस संघर्ष की आंच अब समुद्री व्यापार और वहां सफर करने वाले लोगों पर भी साफ दिखने लगी है।
जहाजों की आवाजाही पर सख्ती और ताजा आंकड़े
2 सितंबर 2026 को सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। इससे पहले 1 सितंबर 2026 को यह संख्या 84 जहाजों की थी, जिनमें से 3 जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया था और 2 पर सैनिकों ने बोर्डिंग की थी। अगर हम 28 अगस्त 2026 की बात करें तो उस समय केवल 75 जहाजों को ही डायवर्ट किया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा अधिकृत 'tanker-for-tanker' नीति के तहत इस नाकेबंदी को इस साल 14 जुलाई 2026 को फिर से लागू किया गया था, जिसके बाद से हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
सऊदी जहाज पर हमला और क्षेत्रीय विरोध
समुद्री सुरक्षा के लिहाज से स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 31 अगस्त 2026 को सऊदी अरब की राष्ट्रीय शिपिंग कंपनी Bahri के VLCC टैंकर Sidr पर एक खतरनाक हमला हुआ। इस हमले में फिलीपींस के दो नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई। इस बात की पुष्टि UK Maritime Trade Operations (UKMTO) और कंपनी Bahri दोनों ने की है। 2 सितंबर 2026 को सऊदी अरब की सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है। दूसरी ओर, ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने दावा किया कि उनके इलाके में कुछ गैर-अनुपालन वाले तेल टैंकर पानी के भीतर बिछाई गई बारूदी सुरंगों से टकराकर आग की चपेट में आ गए हैं। इसके अलावा ईरान के Persian Gulf Strait Authority (PGSA) ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए 56 जहाजों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है और उन पर भारी जुर्माना तथा सामान जब्त करने की धमकी दी है।
अमेरिकी सैन्य हमले और कूटनीतिक उथल-पुथल
वाशिंगटन ने इस बढ़ती आक्रामकता का कड़ा जवाब देते हुए 1 सितंबर 2026 को ईरान के सैन्य ठिकानों पर व्यापक हमले किए। इन हमलों में ईरान के रडार, एयर डिफेंस, खदान बिछाने वाले उपकरण और कम्यूनिकेशन नेटवर्क को निशाना बनाया गया। इन सबके बीच, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 1 सितंबर को कहा कि अगर अमेरिका पुरानी शर्तों पर वापस लौटता है तो ईरान भी युद्धविराम समझौते के लिए तैयार है। समुद्री सुरक्षा एजेंसी Windward की रिपोर्ट बताती है कि इस तनाव के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर सिर्फ 4 रह गई है। इस बीच कूटनीतिक मोर्चे पर पेरू ने 2 सितंबर 2026 को ईरान के साथ अपने सभी राजनयिक संबंध तोड़ लिए, जबकि International Atomic Energy Agency (IAEA) ने ईरान के परमाणु ठिकानों तक पहुंच को लेकर चिंता जताते हुए तुरंत कदम उठाने की मांग की है। इस पूरी खबर की विस्तृत जानकारी आधिकारिक स्रोतों के माध्यम से QNA पर भी उपलब्ध कराई गई है।