अमेरिका में ईरान युद्ध का असर, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों को हुआ 100 बिलियन डॉलर का नुकसान.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को छह महीने पूरे हो गए हैं और इस संघर्ष की वजह से आम नागरिकों की जेब पर बहुत भारी असर पड़ा है। Brown University's Watson Institute for International and Public Affairs की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान अमेरिकी परिवारों को ईंधन के खर्च के रूप में औसतन $763 यानी सात सौ त्रेसठ डॉलर अतिरिक्त चुकाने पड़े हैं। अमेरिका के लोगों ने पेट्रोल और डीजल के लिए कुल मिलाकर $100 billion यानी सौ बिलियन डॉलर ज्यादा खर्च किए हैं, जिससे आम जनता का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है।
ईंधन की कीमतों में भारी उछाल
युद्ध शुरू होने के बाद से पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल की कीमत 39% बढ़कर $2.98 से सीधे $4.15 प्रति गैलन पर पहुंच गई है। वहीं डीजल के दामों में तो 60% से भी ज्यादा की तेजी आई है और यह $3.67 से बढ़कर $5.90 प्रति गैलन हो गया है। अमेरिका के ऊर्जा सचिव Chris Wright ने इस बात की पुष्टि की है कि अभी के ईंधन के दाम साल 2025 की लेबर डे छुट्टी के समय से भी ज्यादा महंगे हो गए हैं।
बाजार और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर
ऊर्जा बाजार में यह उथल-पुथल सीधे तौर पर ईरान के साथ चल रहे तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के कारण है, जैसा कि टेक्सास क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर Tom Seng ने बताया है। विश्व बैंक यानी World Bank के अप्रैल 2026 के कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक में इस साल ऊर्जा की कीमतों में 24% की भारी तेजी आने की आशंका जताई गई थी। इसके अलावा, सात सितंबर 2026 तक ब्रेंट क्रूड का भाव $97.50 प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव $92.50 प्रति बैरल तक पहुंच गया है। बढ़ती ऊर्जा लागत का असर अब खाने-पीने की चीजों पर भी साफ दिखने लगा है, जिससे आम आदमी की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं।
खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़े
कृषि विभाग USDA के अनुमान के अनुसार, इस साल घरों में बनने वाले खाने की कीमतों में 2.5% और बाहर खाने की कीमतों में 3.6% की बढ़ोतरी होगी। पशुओं के चारे और आपूर्ति की कमी के कारण बीफ और वील के दामों में सीधे 9.8% की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप USDA Food Price Outlook की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। ING रिसर्च के विशेषज्ञ Gerben Hieminga का कहना है कि ईंधन और खाद के बढ़ते दामों के कारण एशिया और अफ्रीका के कई कमजोर देशों में भुखमरी और खाद्य सुरक्षा का गंभीर संकट पैदा हो रहा है।
सैन्य तनाव और राजनीतिक बयानबाजी
सैन्य मोर्चे पर तनाव अभी भी पूरी तरह से बना हुआ है और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमले की रिपोर्ट दी है। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने एक अमेरिकी मानवरहित सैन्य पोत को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक एक्सक्लूजन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया है। घरेलू स्तर पर बढ़ रही चिंताओं के बावजूद राष्ट्रपति Donald Trump ने ईंधन के महंगे दामों को तेल कंपनियों की मुनाफाखोरी बताया है। मध्य पूर्व संस्थान के विशेषज्ञ Alan Eyre ने अमेरिकी प्रशासन की इस नीति को बिना तालमेल वाला बताया है, जबकि कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Majed al-Ansari ने कहा है कि अब क्षेत्रीय शक्तियों को अपनी सुरक्षा के लिए खुद आत्मनिर्भर होने की जरूरत महसूस हो रही है।