अमेरिका और ईरान की जंग में गल्फ देशों के बेस तबाह, सामने आई तबाही की तस्वीरें।

वाशिंगटन डीसी से सामने आई कुछ नई तस्वीरों ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों की सच्चाई दुनिया के सामने ला दी है। सीबीएस न्यूज को मिली इन तस्वीरों में क्षतिग्रस्त लड़ाकू विमान, फटे हुए तेंट और भारी नुकसान झेल चुके मिलिट्री ट्रेलर साफ दिखाई दे रहे हैं। ये तस्वीरें सऊदी अरब और कुवैत में बने अमेरिकी सैन्य अड्डों की हैं, जिन्हें वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों ने गोपनीयता की शर्त पर साझा किया है। इन सैनिकों का कहना है कि जमीनी स्तर पर हुआ यह नुकसान आम जनता से छिपाया गया था और हालात काफी गंभीर हैं।
पेंटागन की रिपोर्ट में अरबों के नुकसान का खुलासा
हाल ही में पेंटागन के इंस्पेक्टर जनरल की तरफ से एक रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें संघर्ष के दौरान हुए भारी नुकसान का पूरा लेखा-जोखा दिया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ईरान की तरफ से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन्स की वजह से कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में सैकड़ों इमारतों और सैन्य सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है या वे पूरी तरह तहस-नहस हो चुकी हैं। इस हमले में दर्जनों अमेरिकी सैन्य विमान भी या तो बुरी तरह प्रभावित हुए या पूरी तरह नष्ट हो गए।
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, इस सैन्य अभियान का नाम Operation Epic Fury रखा गया था, जिस पर 28 फरवरी से 30 जून के बीच कुल USD 33.4 billion का भारी खर्च आया। इस कुल राशि में से लगभग USD 22.3 billion केवल हथियार खरीदने और उनके इस्तेमाल पर खर्च किए गए। इस वित्तीय आंकड़े में बेस के बुनियादी ढांचे को दोबारा ठीक करने का खर्च शामिल नहीं है, जिसका मतलब है कि आने वाले समय में यह आर्थिक बोझ और ज्यादा बढ़ जाएगा।
हथियारों के स्टॉक पर मंडराया संकट
इस लंबी लड़ाई के बाद अमेरिकी सेना के पास हथियारों और गोलियों के भंडार में कमी देखी जा रही है। यह स्थिति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रूप के उन बयानों के बिल्कुल उलट है, जिसमें वे लगातार यह कहते आए हैं कि देश के पास हथियारों का स्टॉक बहुत मजबूत और असीमित है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने अब युद्ध की मांग को पूरा करने के लिए हथियारों के निर्माण और कच्चे माल की आपूर्ति को तेज करने का काम शुरू कर दिया है। हालांकि, रक्षा अधिकारियों का मानना है कि घरेलू औद्योगिक क्षमता को इतनी जल्दी बढ़ाना आसान नहीं होगा और इसमें काफी समय लगेगा।
आपको बता दें कि अमेरिका और इजराइल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना था कि इस हमले का मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था, हालांकि ईरानी अधिकारियों ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया है। इसके जवाब में तेरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए, जिससे कई गल्फ देशों में तनाव का माहौल बन गया।
हार्मूल जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी चिंता
इस संघर्ष के बीच ईरानी बलों ने दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक, Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही को भी सीमित कर दिया है। इस रास्ते से दुनिया भर का लगभग पांचवां हिस्सा पेट्रोलियम शिपमेंट के रूप में गुजरता है। इस लॉजिस्टिक बाधा के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊपर चली गई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और कामगारों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है, क्योंकि इस पूरे तनाव का सीधा असर आम जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।