अमेरिका और ईरान की जंग से गल्फ देशों में बढ़ी टेंशन, अमेरिकी कूटनीति पर उठे गंभीर सवाल.

Nura Basta29 August 20262 min read34 viewsWorld
अमेरिका और ईरान की जंग से गल्फ देशों में बढ़ी टेंशन, अमेरिकी कूटनीति पर उठे गंभीर सवाल.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने पूरी दुनिया और खासकर खाड़ी देशों की राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिका के पूर्व राजनयिक एलन आयर ने 29 अगस्त 2026 को बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस युद्ध की वजह से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की साख को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को राजनीतिक और रणनीतिक सफलता में बदलने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। इस स्थिति ने खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी देशों को अपनी सुरक्षा के लिए दूसरे विकल्पों पर सोचने पर मजबूर कर दिया है और अब ये देश अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते हैं।

हॉर्मुज जलडममध्य में तनाव और तेल टैंकर पर हमला

युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और 27 अगस्त 2026 को आई रिपोर्ट के मुताबिक हॉर्मुज जलडममध्य में एक अज्ञात वस्तु की चपेट में आने से एक तेल टैंकर बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस इलाके में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का कड़ा पहरा है और वे इस जलडममध्य पर अपना पूरा नियंत्रण का दावा करते हैं, जबकि अमेरिकी नौसेना ने वहां कड़ा पहरा लगा रखा है। जानकारों का कहना है कि यह मौजूदा गतिरोध साल 2015 के परमाणु समझौते के समय से भी ज्यादा उलझ चुका है। लगातार हमलों और झड़पों के कारण अमेरिकी सेना के पास मिसाइलों का भंडार काफी कम हो गया है, जिसके चलते पेंटागन को अब अपने सैनिकों के रहने और तैनात करने के तरीके में बड़ा बदलाव करना पड़ रहा है। बड़े और फिक्स सैन्य अड्डों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण अमेरिकी सेना को भारी आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है।

क्षेत्रीय देशों की नई सुरक्षा नीतियां और समझौते

इस पूरे घटनाक्रम के बीच खाड़ी और आसपास के देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए समझौते कर रहे हैं। इसी कड़ी में 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर एक नए रक्षा समझौते पर मुहर लगाई है। इसके अलावा 27 अगस्त 2026 को पाकिस्तान की सेना ने कुवैत के साथ सीमा प्रबंधन और सैन्य ट्रेनिंग देने के लिए एक अहम समझौते की पुष्टि की है। वहीं दूसरी तरफ यूएई ने ईरान के साथ अपने सभी व्यापारिक और आर्थिक रिश्तों को पूरी तरह खत्म कर दिया है। यह फैसला व्हाइट हाउस द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत लिया गया है, जिसका नेतृत्व ट्रेजरी സെക്രട്ടറി स्कॉट बेसेंट कर रहे हैं। इसके जरिए ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले इस विवाद को और ज्यादा बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि ईरान के अगले कदमों से हालात कभी भी बदल सकते हैं।

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