अमेरिका और ईरान के बीच फिर भड़की जंग, UAE और जॉर्डन के मिलिट्री बेस पर हुआ हमला तो कच्चे तेल के दाम आसमान पर पहुंचे।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिससे पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें अचानक से बहुत ज्यादा ऊपर चली गई हैं। 1 सितंबर 2026 को दोनों देशों के बीच फिर से लड़ाई शुरू हो गई, जबकि पिछले एक महीने से हालात थोड़े शांत चल रहे थे। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया। ईरान का कहना है कि उन्होंने यह हमला 31 अगस्त को अमेरिका की तरफ से किए गए हमलों के जवाब में किया है। इस पूरी घटना के बाद से खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और नौकरी करने वाले प्रवासियों के बीच डर का माहौल बन गया है.
ओमान की खाड़ी में तेल के टैंकर पर हमला
इससे पहले 31 अगस्त को अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित लारक द्वीप पर ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर जोरदार हमले किए थे। CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने साफ किया था कि यह कार्रवाई इसलिए जरूरी थी क्योंकि ईरान समंदर में बारूदी सुरंगे बिछाने और रॉकेट दागने की बड़ी तैयारी कर रहा था। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि लारक द्वीप पर हुए इस हमले में 2 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इन घटनाओं के बाद ओमान के तट के पास सऊदी अरब के झंडे वाले एक तेल टैंकर पर तीन अलग-अलग मिसाइलें दागी गईं, जब वह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। इस घटना के बाद से समुद्री रास्तों से व्यापार करने वाली कंपनियों में हड़कंप मच गया है.
UAE सरकार की कड़ी चेतावनी और अमेरिकी नेताओं के बयान
संयुक्त अरब अमीरात की सरकार ने इस मामले पर बहुत कड़ी प्रतिक्रिया दी है और अपने देश की जमीन पर हुए इस ईरानी हमले को एक खतरनाक और कतई बर्दाश्त न करने योग्य हमला बताया है। UAE के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उनके देश की सेना ने अपने हवाई क्षेत्र के ऊपर एक ईरानी ड्रोन को हवा में ही मार गिराया है। इन तमाम घटनाओं के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कड़े शब्दों में कहा है कि वह इन्हें करारा जवाब देंगे। इसके अलावा G20 देशों की वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा ले रहे अमेरिकी वित्त सचिव Scott Bessent ने जोर देकर कहा कि अमेरिका ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए कड़े प्रतिबंधों का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा खार्ंग द्वीप को लेकर सोशल मीडिया पर दिए गए बयान सीधे तौर पर तेहरान के लिए एक कड़ा संदेश थे।
ईरान का रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य के हालात
किर्गिस्तान की राजधानी से शंघाई सहयोग संगठन को संबोधित करते हुए ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि यदि अमेरिका जून महीने में हुए उस समझौते पर वापस लौटता है जिससे इस संघर्ष को खत्म किया जा सके, तो ईरान भी वैसा ही सकारात्मक जवाब देगा। इसके साथ ही ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी दोहराया कि उनका देश किसी भी तरह के सैन्य आक्रमण का बहुत कड़ाई से जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस भयंकर संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता लगभग पूरी तरह से बंद हो चुका है, जिसकी वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ा है। लारक द्वीप पर हुए हमले के ठीक बाद इस पूरे इलाके में भारी सैन्य हलचल देखी गई, जिसमें 14 रिफ्यूलिंग विमान और एक F-16 फाइटर जेट को आसमान में तैनात किया गया था। इस तनाव का सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो Gulf देशों में रहकर अपने परिवार का पेट पालते हैं, क्योंकि युद्ध जैसे हालात से हर चीज के महंगे होने का खतरा बढ़ जाता है.