अमेरिका ईरान तनाव: US मिलिट्री ताकत को कमजोर करने में नाकाम, कुवैत और UAE पर ड्रोन हमला

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब बहुत ज्यादा गंभीर हो गया है। अमेरिका के लगातार हमलों के बाद भी ईरान की सैन्य ताकत कमजोर नहीं हुई है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इस पूरे मामले पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर खाड़ी देशों में रहने वाले आम नागरिकों और प्रवासियों पर भी पड़ रहा है।
वॉल्फगांग पुजताई का बड़ा बयान
सुरक्षा मामलों के विश्लेषक और लीबिया में ऑस्ट्रिया के पूर्व रक्षा अताशे Wolfgang Pusztai ने 3 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी कि अमेरिका अभी तक ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से खत्म करने में सफल नहीं हो पाया है। Al Jazeera को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि भले ही दोनों देशों की मंशा अभी बड़े युद्ध की नहीं है, लेकिन छोटे स्तर पर सैन्य टकराव लगातार जारी रहेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर दोनों पक्षों में से किसी की तरफ से भी ज्यादा नुकसान हुआ, तो यह लड़ाई और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकती है.
हालिया हमले और क्षेत्रीय सुरक्षा
हाल ही में U.S. Central Command ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के रडार सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स और संचार बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर कई हमले किए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इन हमलों को एक बड़ा झटका बताया था और कहा था कि अमेरिका किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत, यूएई और जॉर्डन में ड्रोन और मिसाइल दागे। कुवैत के अधिकारियों ने आसमान में दुश्मन की मिसाइलों को रोकने की पुष्टि की है, जबकि CBS News को एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस हमले में क्षेत्र का कोई भी अमेरिकी सैन्य ठिकाना प्रभावित नहीं हुआ है।
जान-माल का नुकसान और आरोप
इस संघर्ष में आम लोगों और सैनिकों की जान जाने से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 18 लोगों की मौत और 108 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने होरमोज़गान प्रांत में अमेरिकी हमले में 4 नागरिकों की मौत को युद्ध अपराध करार दिया है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने आम नागरिकों को निशाना बनाने की बात से इनकार किया है। ईरान की Tasnim News एजेंसी के अनुसार, इस संघर्ष में कम से कम 6 ईरानी सैन्यकर्मी मारे गए हैं जिनमें 3 पायलट भी शामिल हैं। इसके साथ ही ईरान ने होरमोज़ जलडमरूमध्य में नए नौसैनिक बारूदी सुरंग बिछाने का दावा किया है।
अमेरिकी सैन्य तैनाती और कूटनीति
स्थिति से निपटने के लिए अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती को बढ़ाकर साल 2027 तक कर दिया है। अमेरिकी नौसेना होरमोज़ जलडमरूमध्य में लगातार गश्त कर रही है और अब तक 86 कमर्शियल जहाजों को रोक चुकी है जिसमें से 3 को पूरी तरह नाकाम कर दिया गया और 2 जहाजों पर बोर्डिंग की गई। विश्लेषक पुजताई का कहना है कि यह आर्थिक दबाव और सैन्य ताकत ही अमेरिकी रणनीति का मुख्य हिस्सा है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा है कि ईरान और उसके साथी देश अमेरिकी कार्रवाइयों के खिलाफ एकजुट हैं। इस बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं, जिसमें पिछले हफ्ते सार्डिनिया में अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff और यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बीच आगे की स्थिति पर चर्चा हुई है।