Kuwait और Gulf देशों पर ईरान का हमला तेज, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीति रुकी.

Sushma Kumari3 September 20263 min read33 viewsKuwait
Kuwait और Gulf देशों पर ईरान का हमला तेज, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीति रुकी.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा पुराना विवाद फिर से गहरा गया है। दोनों देशों के बीच कूटनीति के रास्ते पूरी तरह बंद हो गए हैं और अब केवल धमकियों और सैन्य हमलों का दौर चल रहा है। 28 फरवरी 2026 को तेहरान पर हुए हमलों के बाद से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। 3 सितंबर 2026 आते-आते तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब ईरान की तरफ से कुवैत को निशाना बनाकर कई मिसाइलें और ड्रोन दागे गए। कुवैत की सेना ने हालांकि इन सभी हमलों को हवा में ही नाकाम करने का दावा किया और इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया।

ईरान और अमेरिका आमने-सामने

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने अमेरिका पर सीधा आरोप लगाया कि उन्होंने युद्ध अपराध किया है। उनका कहना था कि एक मिसाइल हमले में शादी समारोह को निशाना बनाया गया जिसमें चार बेकसूर लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में दो महिलाएं और दो बच्चे शामिल थे जबकि 60 से ज्यादा लोग बुरी तरह जख्मी हो गए। इस घटना के बाद ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी ICC में इस मामले की जांच कराने की मांग उठाई है। दूसरी तरफ अमेरिका पीछे हटने को तैयार नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कर दिया है कि अमेरिका कभी भी ईरान पर हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा है कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले बंद नहीं होते तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। अमेरिकी खजाना विभाग के सचिव Scott Bessent ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले बैंकों और कंपनियों के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है ताकि उन्हें डॉलर आधारित वित्तीय सिस्टम से बाहर किया जा सके। हाउस आर्मड सर्विसेज कमेटी के सदस्य रिपब्लिकन सांसद Pat Harrigan ने इस सैन्य गतिरोध के बारे में बात करते हुए साफ कहा कि दोनों देशों के बीच विवाद पूरी तरह से अटक गया है और इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा है। इस बारे में अधिक जानकारी हैरिगन हाउस मीडिया पर भी देख सकते हैं।

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सैनिक ठिकानों पर हमले और अमेरिकी प्रतिक्रिया

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि उन्होंने जॉर्डन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सेना के कम से कम सात क्षेत्रीय ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जॉर्डन के कैंप तब्रिन पर हुए हमले में किसी भी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की खबर से इनकार किया है। पेंटागन ने यह भी कंफर्म किया कि Operation Epic Fury आधिकारिक तौर पर 5 मई 2026 को खत्म हो चुका है और सभी कर्मचारियों को इस नाम का इस्तेमाल बंद करने को कहा गया है। इसके अलावा अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने समुद्री नाकेबंदी के तहत 86 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला है ताकि उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके।

क्षेत्रीय राजनीति में बड़े बदलाव

पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से बना समझौता अगस्त 2026 में खत्म हो गया है, फिर भी कूटनीतिक बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा है कि अगर अमेरिका सहयोग करता है तो वे समझौते का पालन करने के लिए तैयार हैं। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने चेतावनी दी है कि वे इस आर्थिक नाकेबंदी से निपटने के लिए नई रणनीति तैयार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि पेरू ने ईरान के साथ अपने राजनैतिक रिश्ते पूरी तरह खत्म कर दिए हैं। पेरू का कहना है कि ईरान लगातार क्षेत्रीय अशांति फैला रहा है और जहाजों के आने-जाने के रास्ते में रुकावट पैदा कर रहा है। इसके अलावा तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने मिलकर 7 अगस्त को 'Mecca Joint Defense Agreement' पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मकसद क्षेत्रीय हमलों के खिलाफ मिलकर सुरक्षा करना है। इन हालात का असर खाड़ी देशों में रह रहे आम लोगों और प्रवासियों पर भी पड़ रहा है जो सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं।

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