Strait of Hormuz विवाद गहराया, अमेरिका और ईरान के बीच आमने-सामने की जंग में कुवैत पर भी हुआ हमला.

अमेरिका और ईरान के बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते Strait of Hormuz पर नियंत्रण को लेकर तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। दोनों देश इस क्षेत्र पर अपने-अपने अधिकार का दावा कर रहे हैं और लगातार सैन्य कार्रवाई हो रही है। इस टकराव का असर अब खाड़ी देशों तक भी पहुंच गया है जिससे वहां रहने वाले आम लोगों और प्रवासियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
अमेरिका का दावा और सैन्य कार्रवाई
व्हाइट हाउस ने 28 अगस्त 2026 को एक बयान जारी किया था जिसमें कहा गया कि अमेरिका इस जलडमरूमध्य पर पूरी तरह से नियंत्रण रखता है। राष्ट्रपति Donald Trump ने भी दावा किया कि अमेरिका का इस क्षेत्र पर लगभग पूरा कंट्रोल है जिससे तेल की सप्लाई सुचारू रूप से चल रही है और ईरान का तेल राजस्व जुलाई से पूरी तरह बंद हो चुका है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के मुताबिक उनकी फोर्स ने समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों यानी माइंस को साफ किया है। अमेरिकी बलों ने अब तक 86 कमर्शियल जहाजों को सही रास्ते पर भेजा है, 3 को नाकाम किया और नाकाबंदी लागू करने के लिए 2 जहाजों पर बोर्डिंग की। CENTCOM के कमांडर एडमिरल Brad Cooper ने बताया कि ईरान की बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता अब काफी कमजोर हो गई है। White House Releases के मुताबिक अमेरिका अपनी रणनीति पर पूरी तरह कायम है।
ईरान का पलटवार और आरोप
दूसरी तरफ ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता Ebrahim Zolfaghari ने 3 सितंबर 2026 को साफ कहा कि अमेरिकी नियंत्रण जैसी कोई बात नहीं है और ईरान ने उस जलडमरूमध्य के दक्षिण में रास्तों पर रात भर में और नई नौसैनिक माइंस बिछा दी हैं। इससे पहले 2 सितंबर को IRGC ने दावा किया था कि उन्होंने दो ऐसे तेल टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया जो उनकी बात नहीं मान रहे थे और अमेरिकी सेना के कहने पर गलत रास्तों का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके अलावा ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने सीरिक में एक शादी समारोह पर हुए हमले को लेकर अमेरिका पर बड़ा आरोप लगाया। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हुई और 67 लोग घायल हुए, हालांकि बाद में ईरान के स्वास्थ्य मंत्री ने इन आंकड़ों को बदलते हुए 18 लोगों के मारे जाने और 108 के घायल होने की बात कही। अमेरिकी सेना ने नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने की बात से साफ इनकार किया है।
समुद्री कानून और हालिया हमले
समुद्री यात्रा के नियमों को लेकर भी दोनों देशों के बीच कानूनी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। अमेरिका का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून यानी UNCLOS अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह से मान्य है, जबकि ईरान का तर्क है कि इसके नियम सिर्फ उन्हीं देशों पर लागू होते हैं जो इसके हस्ताक्षरकर्ता हैं। इस बीच सैन्य गतिविधियों में भारी तेजी आई है। अमेरिका ने 1 सितंबर से 2 सितंबर के बीच कुल 40 कमर्शियल जहाजों को इस रास्ते से सुरक्षित निकाला जो 18 मिलियन बैरल तेल लेकर जा रहे थे। यह युद्ध के दौरान का एक नया रिकॉर्ड है। इसके साथ ही अमेरिकी सेना ने ईरान के लगभग 100 ठिकानों पर हमले किए जिनमें रडार सिस्टम और ईरान के सरकारी स्वामित्व वाले 2 तेल टैंकर भी शामिल हैं। 3 सितंबर को कुवैत की सेना ने जानकारी दी कि उन्होंने ईरान की तरफ से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन्स को बीच में ही रोक लिया। ईरान का कहना था कि ये हमले कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और इराक में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर किए गए थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों के जवाब में ईरानी रडार सिस्टम और माइंस बिछाने वाले संसाधनों पर अमेरिकी हमलों के दूसरे दौर की पुष्टि की है। खाड़ी देशों में चल रहे इस तनाव से वहां काम करने वाले प्रवासियों और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।