अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेज, छह हफ़्ते में बड़े हमले की चेतावनी से गल्फ देशों में बढ़ा खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुकी है, जहाँ एक पूर्व अमेरिकी राजनयिक ने आने वाले छह हफ़्ते के भीतर ईरान की तरफ से किसी बड़े और खतरनाक हमले की आशंका जताई है। 4 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार सुरक्षा हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिसके चलते अमेरिकी विदेश विभाग ने सभी गल्फ देशों के लिए यात्रा को लेकर चेतावनी जारी करते हुए नागरिकों से सतर्क रहने को कहा है। इस तनाव का असर उन लाखों प्रवासियों और भारतीय कामगारों पर भी पड़ रहा है जो रोजी-रोटी के सिलसिले में इन खाड़ी देशों में रहते हैं।
अमेरिका और ईरान आमने-सामने
वाशिंगटन और तेहरान के बीच बयानबाजी बहुत ज्यादा आक्रामक हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कहा है कि अमेरिका जब चाहे ईरान पर दोबारा हमले करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं दूसरी ओर, उपराष्ट्रपति JD Vance ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक ईरान हॉर्मज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर हमले बंद नहीं करता, तब तक अमेरिका उससे कोई बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मिलिट्री प्रेशर समेत सभी विकल्प खुले हुए हैं। इस पूरे संघर्ष के दौरान अमेरिकी वाणिज्य सचिव Howard Lutnick ने पुष्टि की है कि अब तक इस टकराव में 18 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है।
ईरान की आक्रामक प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय सुरक्षा
ईरान की तरफ से भी लगातार तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। ईरान के उपराष्ट्रपति Mohammad Reza Aref ने बयान दिया कि अमेरिकी कार्रवाइयों ने उनके देश की सुरक्षा रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है और अब वे 'असिमेट्रिकल' रणनीति पर काम कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले महीने बहुत मुश्किल भरे होने वाले हैं। इसके अलावा ईरान के वायु रक्षा कमांडर ने भी किसी भी संभावित टक्कर के लिए पूरी तरह तैयार रहने की बात कही है। ईरानी सेना के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने संयुक्त बयान में चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी जमीन से कोई नया हमला हुआ, तो उसका जवाब बहुत भारी होगा और उन ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा जहाँ से हमले किए जा रहे हैं।
गल्फ देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों का असर
क्षेत्रीय तनाव का दायरा अब गल्फ देशों तक फैल चुका है। पिछले दिनों 2 सितंबर 2026 को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन में स्थित दो अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और इराक में अमेरिकी संपत्तियों को भी निशाना बनाया। जॉर्डन की सेना ने हवा में ही 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया, जबकि कुवैत सिटी में एक ड्रोन गिरने से रिहायशी इलाके में आग लगने की घटना सामने आई। कुवैत सरकार ने इन ईरानी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन करार दिया है। इसके साथ ही, ईरान के कुहेस्तक क्षेत्र में कथित तौर पर एक शादी समारोह पर हुए हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत और 60 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबरें आई हैं, जिनकी संयुक्त राष्ट्र से जांच कराने की मांग की गई है। इजराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने भी चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने इजराइल पर हमला किया, तो उसकी पूरी बुनियादी संरचना को नष्ट कर दिया जाएगा। खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि क्षेत्रीय अस्थिरता का सीधा असर आम जनजीवन और सुरक्षा पर पड़ता है।