US-Israel Conflict: अमेरिका और इसराइल का ईरान के साथ संघर्ष पूरे छह महीने का हुआ, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव.

Nura Basta28 August 20263 min read16 viewsWorld
US-Israel Conflict: अमेरिका और इसराइल का ईरान के साथ संघर्ष पूरे छह महीने का हुआ, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव.

अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहा सैन्य और आर्थिक संघर्ष अपने पूरे छह महीने के पड़ाव पर पहुंच गया है। इस जंग की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इसराइल ने मिलकर हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी और पूरे ईरान में परमाणु और सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा था। पिछले छह महीनों के दौरान यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले लिया है। आम लोग और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी इस स्थिति को लेकर काफी चिंतित हैं क्योंकि इसका असर आम जीवन और सुरक्षा पर साफ दिखाई दे रहा है।

क्षेत्रीय संकट और खाड़ी देशों पर असर

ईरान की तरफ से लगातार ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल से हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों में इसराइल के अलावा खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और अमेरिका के साथी देशों को निशाना बनाया गया है। लेबनान में हिजबुल्लाह ने उत्तरी इसराइल पर कई रॉकेट दागे, जिसके जवाब में इसराइल ने बड़ा सैन्य अभियान चलाया और लेबनान के लगभग एक-पांचवें हिस्से पर कब्जा कर लिया है। इसके अलावा इराक और सीरिया में ईरान समर्थित लड़ाकों ने गठबंधन सेना के ठिकानों पर हमले किए हैं, और लाल सागर में हूती विद्रोहियों ने भी मोर्चा संभाल रखा है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कुवैत जैसे क्षेत्रीय देशों को भी इन हमलों का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण ईरान समर्थित समूहों के साथ झड़पें हुई हैं।

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युद्ध के उद्देश्य और राजनीतिक बयानबाजी

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने साफ कहा है कि इस युद्ध का मकसद ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल ताकत को खत्म करना, उसकी नौसेना को नेस्तनाबूद करना, परमाणु हथियार बनाने से रोकना, प्रॉक्सी समूहों को मिलने वाली मदद को रोकना और वहां सत्ता परिवर्तन करना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि जब तक जरूरी होगा, यह युद्ध जारी रहेगा और उनका दावा है कि ईरान अभी समझौता करने के लिए बेताब है। दूसरी ओर, ईरान की सरकारी प्रवक्ता Fatemeh Mohajerani ने कहा है कि ईरान ने अपने दुश्मनों को बहुत करारा जवाब दिया है और वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने अमेरिका और इसराइल पर युद्ध अपराध का औपचारिक आरोप लगाया है, जबकि तेहरान ने अमेरिका द्वारा लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों को मानवता के खिलाफ अपराध बताया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और कूटनीतिक प्रयास

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सामरिक तनाव अभी भी बना हुआ है, जिसे ईरान ने पहले वैश्विक शिपिंग के लिए बंद कर दिया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल Brad Cooper ने बताया कि यह रास्ता फिलहाल खुला है और स्थिति में सुधार हो रहा है, हालांकि रिपोर्ट बताती हैं कि अमेरिकी सैन्य नाकेबंदी के कारण 75 जहाजों को ईरानी बंदरगाहों से मोड़ दिया गया है। इन हालातों के बीच खबर है कि बिचौलियों के कहने पर ईरान इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए शर्तें तैयार कर रहा है। इसके अलावा, युद्ध के कारण यूरोप में अमेरिकी सेना के पास पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर की भारी कमी हो गई है। कूटनीतिक मोर्चे पर, पाकिस्तान की मध्यस्थता वाला युद्धविराम और जून का समझौता hostilities को रोकने में नाकाम रहे हैं। इस बीच, रूस में ईरान के राजदूत Kazem Jalali ने अजरबैजान के रास्ते रूस से ईरान तक गैस पाइपलाइन बिछाने की बातचीत में अच्छी प्रगति होने की जानकारी दी है। Al Jazeera English द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में इस संघर्ष के मानवीय और आर्थिक नुकसान का ब्योरा दिया गया है, क्योंकि विश्लेषकों का मानना है कि इस छह महीने की जंग ने पूरे मध्य क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है।

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