अमेरिका, इसराइल और ईरान में छह महीने के युद्ध के बाद राजनीतिक संकट गहराया, कई बड़े फैसले लिए गए

अमेरिका और इसराइल द्वारा शुरू किए गए युद्ध के छह महीने पूरे होने के बाद अब इन तीनों देशों की सरकारों के सामने गंभीर अंदरूनी राजनीतिक संकट खड़े हो गए हैं। इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जिसमें सबसे पहले ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था और उसके बाद ईरान ने भी अमेरिका और क्षेत्रीय संपत्तियों पर जवाबी हमले किए थे। हालांकि जून 2026 में पाकिस्तान की तरफ से कूटनीतिक प्रयास किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद यह संघर्ष अभी भी जारी है और थमने का नाम नहीं ले रहा है।
अमेरिका का नया आर्थिक कदम और प्रतिबंध
इस बीच अमेरिकी प्रशासन ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 24 अगस्त 2026 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने "Operation Economic Outcast" नाम से एक नए अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत ईरान और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर कई तरह के नए और कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं ताकि ईरान के आर्थिक रास्तों को रोका जा सके। इस बारे में अधिक जानकारी US Department of the Treasury की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को इस युद्ध की वजह से अमेरिकी सेना पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ और कम होते हथियारों के स्टॉक को लेकर देश के भीतर ही तीखे सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
अमेरिकी राजनीति में भी हलचल तेज है क्योंकि 29 अगस्त 2026 को सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने राष्ट्रपति के तेल उद्योग से जुड़े रिश्तों को लेकर उनकी कड़ी आलोचना की थी। हालांकि तनाव के बीच अमेरिका ने कतर, कुवैत और बहरीन में तैनात सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को वापस लौटने की अनुमति दे दी है, लेकिन अफ्रीका में अभी भी कई राजदूतों के पद खाली पड़े हैं जो कूटनीतिक सुस्ती को साफ दिखाते हैं।
ईरान में अंदरूनी कलह और जनता का गुस्सा
ईरान की बात करें तो वहां की सत्ता सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के हाथों में है। मोजतबा ने शुरुआती हमलों में मारे गए अपने पिता की मौत के बाद सत्ता संभाली थी। फिलहाल देश के भीतर इस बात को लेकर गुटबाजी चल रही है कि आर्थिक राहत के लिए देश के तेल और ईंधन रिजर्व का इस्तेमाल किया जाए या नहीं। ईंधन के बढ़ते दामों और सरकार द्वारा दी जा रही सजा-ए-मौत के खिलाफ आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। पीपुल्स मुजाहिददीन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ ईरान यानी PMOI/MEK ने 23 से 29 अगस्त 2026 के बीच देश भर में गुप्त रूप से कई विरोध प्रदर्शन किए।
ईरान के खुफिया मंत्रालय ने 28 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी कि पुराने प्रदर्शनों से जुड़े 30 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं दूसरी ओर, ओमान के साथ 26 अगस्त 2026 को एक समझौता हुआ जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर बनाया गया है। लेकिन ईरान के उप विदेश मंत्री काज़म ग़रीबाबादी ने यह साफ कर दिया है कि यह रास्ता केवल अमेरिकी जहाजों के लिए ही सीमित रहेगा और बाकी नौकाओं के लिए इस पर पाबंदी है।
इसराइल में राजनीतिक अस्थिरता और चुनाव
दूसरी तरफ इसराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसराइल में आगामी 27 अक्टूबर 2026 को बहुत ही महत्वपूर्ण संसदीय चुनाव होने वाले हैं। नेतन्याहू के गठबंधन दलों का समर्थन लगातार कम हो रहा है। जनता इस बात से नाराज है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का कोई खास असर नहीं दिखा और गाजा को लेकर पेश किए गए रोडमैप पर नेतन्याहू का रवैया सही नहीं रहा। राजनीतिक नफा-नुकसान को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पहले इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इसके अलावा इसराइल में आम लोगों की जिंदगी भी प्रभावित हुई है और अगस्त 2026 के पूरे महीने बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कामकाज में भारी रुकावटें देखने को मिली हैं जिससे यात्रियों को खासी परेशानी उठानी पड़ी है।